स्थापना के 16 साल बाद भी महाविद्यालय उधार के भवन पर चल रहा है। भवन और भूमि महाविद्यालय के नाम दर्ज न होने से कॉलेज को राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) से अनुदान नहीं मिल पा रहा है। जिससे छात्रों के लिए पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल मैदान और शिक्षकों के बैठने की व्यवस्था नहीं है।
लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2003 में 19 विषयों के साथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना हुई थी। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत महाविद्यालय को जीआईटीआई और आदर्श विद्यालय के कुछ कक्ष आवंटित किए गए थे। शासन-प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते तब से पीजी कॉलेज इन्हीं उधार के भवनों पर भगवान भरोसे चल रहा है। शुरूआती दौर में कॉलेज में छात्र संख्या तीन-चार सौ थी, जो अब बढ़कर 850 पहुंच गई है।
अलग-अलग समय अंतराल में छात्रसंघ समारोह में पहुंचे चार मुख्यमंत्रियों व मंत्रियों ने महाविद्यालय में पहुंचकर भवन और भूमि की समस्या को दूर करने की घोषणा की, लेकिन समस्या जस की तस बनी है। भवन और भूमि महाविद्यालय के नाम पर दर्ज न होने से चित्रकला, मनोविज्ञान, पर्यटन, बीबीए, बीसीए, संगीत विषयों की कक्षाएं शुरू नहीं हो पा रही है। प्राचार्य डा. अशोक कुमार का कहना है कि भवन और भूमि न मिलने से छात्रों से लेकर शिक्षकों को दिक्कत हो रही है। जिस स्थान पर कालेज चल रहा है, वह पूरा महाविद्यालय के नाम हो या नए स्थान पर भूमि मिले। विधायक धन सिंह नेगी का कहना है कि चवालखेत और कुठ्ठा में पीजी कॉलेज के लिए भूमि चिह्नित करने का काम चल रहा है। भूमि उपलब्ध होते ही महाविद्यालय का भवन निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा।