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चालखाल और गाड गदेरों के सरंक्षण होना जरूरी

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नई टिहरी। डालियों का दगड्या संस्था और एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि ने जाखणीधार ब्लाक के चंपाधार कठूली में जल शक्ति अभियान के तहत कार्यशाला आयोजित कर ग्रामीणों को प्राकृतिक धारा, चालखाल, गाड़, गदेरों के संरक्षण की जानकारी दी। उन्होंने इस मौके पर पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया।
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चंपाधार कठूली में आयोजित कार्यशाला के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा कि गांव में प्राकृतिक धारे, पनेरे, चालखाल, गाड़, गदेरे थे, लेकिन उनका संरक्षण न होने के कारण सूखने की स्थिति में आ गए हैं। उन्होंने ग्रामीणों से इनके संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने पर जोर दिया। गढ़वाल विवि के भूगोल विभाग के प्रो. मोहन सिंह रावत ने कहा कि ग्रामीणों के सहयोग से चालखाल, प्राकृतिक स्रोतों के पुनर्जीवित करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। बताया कि कठूली गांव का पलायन रोकने के लिए कृषि विकास की योजनाएं चलाई जार रही है। पर्वतीय विकास शोध संस्थान के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि विभिन्न स्थानों पर रह रहे प्रवासियों को एक साल में कुछ दिनों के लिए अपने गांव आकर समस्याओं का निराकरण करने में मदद करनी चाहिए। एसएसबी से सेवानिवृत्त कमांडेंट शूरवीर सिंह कैंतुरा ने बताया कि वह लंबे समय वर्ष में तीन माह गांव में रहकर ग्रामीणों की समस्याओं का हल करवाने से लेकर पलायन रोकने का प्रयास कर रहे हैं। इस मौके पर प्रधान बमु देवी, राजेश्वरी देवी, रजनी देवी, छुमा देवी, मंजू, पार्वती, कुलमा देवी, आशाराम ममगाईं आदि मौजूद थे।
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