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नदी, नाले व चालखाल बचाने को हो प्रयास

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नई टिहरी। पूर्व मंत्री और श्री देवभूमि लोक संस्कृति विरासतीय शोभा यात्रा समिति के संयोजक मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा लगातार सिकुड़ते नदी, नाले, चालखाल और कम होते जंगलों को बचाने की चुनौती हम सबके सामने है। कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए सामाजिक चेतना जरूरी है।
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शनिवार को पत्रकार वार्ता में लोक संस्कृति समिति के संयोजक गांववासी ने कहा कि गाड-गदेरे, नदी, नालों के जीवित रहने से ही गंगा नदी का अस्तित्व कायम रहेगा। कहा कि वर्तमान में प्रतापनगर के सेम मुखेम नागराजा ऊपर स्थित चालखाल से लेकर बांज, बुरांस, काफल समेत विभिन्न प्रजाति के जंगल खतरे में है। वर्तमान में वहां पर नैर, थुनैर से लेकर अन्य प्रजाति के पौधे नहीं है। कहा कि समिति वन विभाग के सहयोग से पांच अगस्त से सेम मुखेम में सघन पौधरोपण और चालचाल संवर्द्धन का अभियान शुरू किया जा रहा है। कहा कि मुखेम में विभिन्न प्रजाति के करीब पांच सौ पौध लगाए जाएंगे। कहा कि पौधे के संरक्षण के लिए क्षेत्र के लोगों को भी अभियान में शामिल कर जनसहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस मौके पर समिति के मंत्री द्वारिका प्रसाद भट्ट, डा. धीरेंद्र रांगड़, गजेंद्र कंडियाल, सुन्नी रावत, तेजराम सेमवाल, महिपाल बिष्ट, जीवाराम भट्ट, रोशन आर्य, यतेंद्र कंडियाल, मस्तराम भट्ट, जीतराम भट्ट आदि मौजूद थे।
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