नई टिहरी। सरकार कृषि, औद्यानिकी एवं वानिकी को बढ़ावा देने के लिए कई दावे कर रही है, लेकिन इनसे जुड़े संस्थानों की सुध नहीं ले रही है। उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भी उनमें से एक है। कुलपति, कुलसचिव, तीनों कैंपस के डीन लंबे समय से काम चलाओ व्यवस्था पर चल रहे हैं, जबकि प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर के दर्जनों नॉन टीचिंग के सैकड़ों पद रिक्त चल रहे हैं। नॉन टीचिंग में विवि का कामकाज उपनल कर्मचारी ही संभाल रहे हैं।
सरकार की अनदेखी औद्यानिकी एवं वानिकी विवि पर भारी पड़ रही है। विवि लंबे समय से मैन पावर की कमी से जूझ रहा है। अगस्त 2017 में कुलपति प्रो. मैथ्यू प्रसाद ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। तब सरकार ने विवि के वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी में प्रतिनियुक्ति पर डीन के पद पर कार्यरत प्रो. सीएम शर्मा को छह-छह माह के लिए एक साल के लिए कुलपति बनाया था। 2018 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह अपने मूल विभाग चले गए थे। इसके बाद जीबी पंत कृषि विवि के कुलपति, विवि के ही सीनियर प्रोफेसर, गढ़वाल आयुक्त और फिर से तीन जुलाई को जीबी पंत विवि के कुलपति को ही प्रभार दिया गया है।
वर्तमान में विवि के प्रो. बीपी नौटियाल जो औद्यानिकी महाविद्यालय भरसार परिसर के प्रभारी डीन हैं, वही कुलसचिव का अतिरिक्त प्रभार देख रहे हैं। विवि के रानीचौरी और चिरबटिया परिसर में स्थायी डीन भी नहीं है। यहां पर प्रभारी डीन ही व्यवस्था देख रहे हैं। साथ ही विवि में सहायक कुलसचिव, डिप्टी डायरेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर सिविल, असिस्टेंट डायरेक्टर फार्म के दो-दो, वित्त नियंत्रक एक के स्वीकृत है। लेकिन सभी पद रिक्त चल रहे हैं, जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर के 56, एसोसिएट प्रोफेसर 34, प्रोफेसर के नौ पद खाली है। नॉन टीचिंग करीब 320 पद रिक्त हैं। इन पदों के सापेक्ष उपनल कर्मी अपनी सेवाएं देकर कामकाज संभाल रहे हैं। विवि के कृषि विज्ञान केंद्र में फरवरी 2019 में नॉन टीचिंग के 10 पदों के लिए इंटरव्यू हुआ, लेकिन अभी तक रिजल्ट जारी नहीं हो पाया। प्रभारी कुलसचिव प्रो. बीपी नौटियाल ने बताया कि कुलपति की नियुक्ति शासनस्तर से होनी है।