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जर्जर स्कूलों में पढ़ने को मजबूर हैं छात्र-छात्राएं

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नई टिहरी। सरकार बेहतर शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन वर्षों से जर्जर बने स्कूल भवनों के नीचे पढ़ने को मजबूर छात्र-छात्राओं की सुध नहीं ले रही हैं। जिले में कई वर्षों से 72 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के भवन क्षतिग्रस्त बने हुए हैं। शिक्षा विभाग ने भवन के पुनर्निर्माण हेतु शासन से बजट की मांग की थी। बावजूद तीन साल बाद भी भवनों के पुनर्निर्माण को बजट नहीं मिल पाया है। क्षतिग्रस्त स्कूलों के पुनर्निर्माण को करीब 14 करोड़ रुपये की धनराशि की जरूरत है।
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जिले में आपदा से लेकर मरम्मत के अभाव में 70 प्राथमिक और दो उच्च प्राथमिक स्कूलों के भवन कई वर्षो से क्षतिग्रस्त हैं। भवनों के क्षतिग्रस्त होने से स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं खुले मैदान में बैठते हैं। विभाग ने वर्ष 2017-18 में 38, 2018-19 में 30 और 19-20 के लिए चार स्कूलों के पुनर्निर्माण करवाने हेतु शासन को बजट हेतु प्रस्ताव भेजा था। बावजूद सरकार ने अभी तक भवन के पुनर्निर्माण को बजट उपलब्ध नहीं करवाया है। ऐसे में सरकार की ओर से तीन सालों से निरंतर स्कूलों के पुनर्निर्माण को बजट न देना बेहतर शिक्षा के दावों की पोल खोलती है। समन्वयक समग्र शिक्षा ज्ञान प्रकाश सिलस्वाल का कहना है कि जिले के 72 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक स्कूलों के पुनर्निर्माण को शासन को बजट हेतु प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक बजट नहीं मिल पाया है।
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