जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने शिकायतकर्ता को पैसेंजर बोट उपलब्ध न करवाने वाली मुंबई की एक कंपनी को सात लाख 35 हजार रुपये की धनराशि 12 फीसदी ब्याज सहित देने के आदेश पारित किए हैं।
तहसील प्रतापनगर के रिंडोली निवासी अरविंद ने 30 अगस्त 2018 को जिला उपभोक्ता विवाद में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उन्होंने 2017 में मुंबई की मरीन प्राइवेट लि. कंपनी को एक पैसेंजर बोट बनाने का आर्डर दिया था। कंपनी की सेवा शर्त के अनुसार निर्धारित समय में उन्होंने बैंक से सात लाख 35 हजार का कर्ज लेकर जमा करवाया था, लेकिन लंबे समय बाद भी उन्हें बोट उपलब्ध नहीं करवाई गई। इसके चलते ब्याज सहित बैंक किश्त जमा करनी पड़ रही है। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने कंपनी को नोटिस भी जारी किया।
बावजूद समस्या का निराकरण नहीं हो पाया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम की अध्यक्ष कुमकुम रानी और सदस्य विनोद रतूड़ी ने शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए संबंधित कंपनी आदेश दिया है कि सात लाख 35 हजार रुपये 12 फीसदी ब्याज के साथ ही 10 हजार वाद व्यय, 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में एक माह के अंदर दें।