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उधार के दो कमरों में चल रहा कमांद डिग्री कॉलेज

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कंडीसौड़ (टिहरी)। उच्च शिक्षा का हाल भी अजब-गजब है। चार साल से कमांद महाविद्यालय उधार के दो कमरों में चल रहा है। कहने को महाविद्यालय में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, इतिहास, राजनीति शास्त्र और समाज शास्त्र की कक्षाएं संचालित होती है, लेकिन इतिहास को छोड़कर अन्य विषयों में एक भी शिक्षक कार्यरत नहीं है।
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उच्च शिक्षा की अलख जगाने के लिए थौलधार ब्लॉक के कमांद में 20 अगस्त 2016 को डिग्री कॅलेज की स्थापना की गई थी। महाविद्यालय खोलने के पीछे उद्देश्य था कि क्षेत्र के 88 ग्राम पंचायतों के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए 75 किमी दूर बादशाहीथौल, नई टिहरी और उत्तरकाशी का रुख न करना पड़े, लेकिन शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते स्थापना के चार साल बाद भी महाविद्यालय अपने उद्देश्य पर खरा नहीं उतर पाया है। उस समय वैकल्पिक व्यवस्था के तहत महाविद्यालय संचालन के लिए कंमाद इंटर कॉलेज और पंचायत भवन का एक-एक कमरा आवंटित किया गया था। इंटर कॉलेज की 50 नाली भूमि महाविद्यालय के नाम प्रस्तावित थी। हिंदी के शिक्षक दो साल से मेडिकल पर हैं, जबकि संस्कृत, समाज शास्त्र और राजनीति शास्त्र की पढ़ाई प्रत्येक सत्र में छह माह तक गेस्ट फैकल्टी के भरोसे है। संसाधनों के अभाव में कॉलेज में छात्रों की संख्या 78 से अधिक नहीं रही है।

महाविद्यालय के लिए प्रस्तावित 50 नाली भूमि का सीमांकन कर जिला प्रशासन ने सालभर पहले शासन को रिपोर्ट भेजी थी, लेकिन शासनस्तर से महाविद्यालय को इस संबंध में कोई भी दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
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-पुष्पा नेगी, प्राचार्य, कमांद महाविद्यालय
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