नई टिहरी। टीएचडीसी हाइड्रो पावर अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान में इंटेलीजेंट कंप्यूटिंग एंड स्मार्ट कम्युनिकेशन (आईसीएससी 2019) विषय पर आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि कंप्यूटिंग और संचार के क्षेत्र में नए विचारों को साझा करने से छात्रों, शोधकर्ताओं को कई महत्वपूर्ण जानकारी हासिल होती हैं। कहा कि शोधकर्ताओं को वास्तविक दुनिया के प्रयोगों के साथ पेचीदा समस्याओं को हल करने के तरीके ढूंढ़ने चाहिए।
भागीरथीपुरम में आयोजित तीन दिवसीय सेमिनार का उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनएस चौधरी, टीएचडीसी आइएचईटी के बोर्ड आफ गवर्निंग के चेयरमैन प्रो. डीपी कोठरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कुलपति ने कहा कि आईसीएससी 2019 टिहरी में होने से देश विदेश के शिक्षाविदों को एक जगह सुनने का मौका उत्तराखंड छात्रों को मिला है। उन्होंने कहा की सेमिनारों के माध्यम से छात्रों के अंदर शोध को लेकर जागरूकता पैदा होती। जॉर्डन से आए प्रो. अशरफ सामरहा ने कंप्यूटिंग और संचार के क्षेत्र में नई तकनीकी गतिविधियों से अवगत कराया। वीजेटीआई मुंबई की प्रो. अनला अनिरुद्ध पंडित, सेंट्रल प्रोजेक्ट एडवाइजरी के प्रो. एमपी खोडके ने कहा कि छात्रों को केवल शोध पत्र प्रकाशित करने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे शोध करने चाहिए जिससे समाज को लाभ मिल सके। आयोजक संस्थान के निदेशक प्रो. जीएस तोमर ने गतिविधियों से अवगत कराते हुए बताया कि प्रयास किया जा रहा है, कि निरंतर नए प्रयोग कर छात्रों को उच्च गुणवत्ता की तकनीकी शिक्षा दी जाए। इस दौरान छात्रों के करीब चार सौ शोध पत्र भी प्रकाशित किए गए। इस मौके पर कोर्डिनेटर महेश अगरवारिया, सह कोर्डिनेटर विवेक कुमार, डा. ऋचा बिजल्वाण, मनदीप गुलरिया, डा. सुमित कुमार, आशीष जोशी, नंदिता कोहली, वैशाली कंसल, समीर वर्मा, अमित कुमार, राम नरेश पाल, मनीष, हरदेव, बनीत नेगी, विक्रांत कुमार, ज्योति प्रकाश सेमवाल, हिमांशु कन्याल आदि मौजूद थे।