नई टिहरी। केंद्र सरकार की बेरुखी से गरीबों के बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा देने के लिए बना आरटीई दम तोड़ता नजर आ रहा है। सरकार को स्कूलों की फीस से लेकर बच्चों की ड्रेस, किताब के लिए पैसा देना था, लेकिन तीन साल से इसके लिए बजट नहीं दिया है। वर्ष 2015 से अब तक पांच करोड 27 लाख, 47 हजार रुपये बकाया चल रहा है। जिसके चलते निजी स्कूल संचालक इस सत्र से गरीब बच्चों को प्रवेश देने के लिए हाथ खड़े कर रहे है। 30 अप्रैल तक बकाया भुगतान न होने पर बच्चों को प्रवेश नहीं देंगे।
पूववर्ती केंद्र सरकार ने गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में निशुल्क बेहतर शिक्षा देने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम बनाया था। इसके तहत प्रत्येक प्राइवेट स्कूल की कुल सीटों के 25 फीसदी पर नर्सरी कक्षा में गरीब बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिया जाता है। इसके बदले केंद्र सरकार स्कूलों को फीस देती है। जबकि बच्चों को ड्रेस, किताब के लिए पैसा उनके खातों में डालती है। लेकिन वर्ष 2015 से लेकर 2018-19 तक एक भी रुपये का बजट उपलब्ध नही करवाया। टिहरी जिले का शिक्षा के अधिकार के तहत केंद्र सरकार पर पांच करोड़ 27 लाख 47 हजार 930 रुपये बकाया चल रहा है। वर्तमान में दो हजार 402 बच्चे आरटीई में विभिन्न प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे है। स्कूल संचालक जल्द भुगतान न होने पर इस सत्र से निशुल्क प्रवेश देने को तैयार नही है। ऐसे में सरकार की बेरुखी से गरीब बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण करने वंचित रह सकते है। वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालय संगठन के अध्यक्ष पीडी सेमवाल, सरंक्षक प्रवीन जगूड़ी का कहना है कि 2015 से वह बच्चों को निशुल्क पढ़ा रहे है। बजट न मिलने के कारण उन्हेें टीचरों को मानदेय देना मुश्किल हो गया है। बताया कि सरकार को 30 अप्रैल तक लंबित भुगतान करने की चेतावनी दी गई है। यदि निर्धारित तिथि तक भुगतान नही होता है, तो नए छात्रों को प्रवेश नही दिया जाएगा।
इनका कहना है-
पांच करोड़ 27 लाख 47 हजार 930 रुपये बकाया भुगतान के लिए सरकार से बजट की मांग की गई है। उम्मीद है कि जल्द ही बजट मिल जाएगा। सभी स्कूलों को प्रवेश देने के लिए कहा जाएगा।
-ज्ञान प्रकाश सिलस्वाल, जिला समन्वयक समग्र शिक्षा अभियान।