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बैसाखी मेलों के रंग में रंगा गढ़वाल

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उत्तरकाशी/चिन्यालीसौड़। बैसाखी का पावन पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। ग्रामीणों ने देव डोलियों के साथ गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित किया। रविवार को गढ़वाल गाड़ एवं कुमराड़ा चिन्यालीसौड़, बाड़ागड्डी के सिल्याण, गाजणा के चौरंगीखाल आदि स्थानों पर बैसाखी मेले हुए।
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चौरंगीखाल नचिकेता ताल में बैसाखी मेले में ग्रामीण देव डोलियों के साथ पहुंचे। सिल्याण गांव में हरि महाराज का मेला हुआ, जिसमें नाग, कंडार देवता की डोलियों के साथ ग्रामीणों ने नृत्य किया। हरि महाराज एवं हूण देवता के पश्वा अवतरित होने पर उन्हें दूध से नहलाया गया। इस मौके पर स्वामी स्वरूपानंद, ब्लाक प्रमुख चंदन पंवार, सत्यदेव पंवार, नत्थी सिंह, रामेश्वर सिंह, हरदेव सिंह, मनोज राणा, सत्यनारायण प्रसाद, शक्ति प्रसाद आदि मौजूद रहे।
उधर, चिन्यालीसौड़ के गढ़वालगाड़ और कुमराड़ा के थौला तोक में भी बैसाखी मेले हुए। गढ़वालगाड़ में जागर गायक सुंदरलाल नरवाण ने देवताओं की स्तुति की। यमुनोत्री विधायक केदार सिंह रावत ने कहा कि पारंपरिक मेले हमारी समृद्ध संस्कृति के संवाहक हैं। इस मौके पर पूर्व प्रमुख रजनी कोटवाल, प्रधान शिंदा देवी, सोनी देवी, जीत सिंह चौहान, लक्ष्मण चौहान, बिशन कोटवाल, कोमल चौहान, धर्म सिंह चौहान, अतर सिंह नेगी, कृपाल चंद रमोला, दीपक रावत, विनोद पुरसोड़ा, विजेंद्र जयाड़ा, मकान सिंह, धूम सिंह कठैत आदि मौजूद रहे। उधर, गढ़ बरसाली गांव स्थित रेणुका देवी मंदिर में भी तीन दिवसीय मेला शुरू हुआ। इस मौके पर उक्रांद नेता विष्णुपाल रावत, जेठूलाल भारती, मेला प्रबंधक महेश बहुगुणा, भगवती बहुगुणा, सुमन प्रकाश गैरोला, अतोल पंवार आदि मौजूद रहे।
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कंडीसौड़ (टिहरी)। बैसाखी के पर्व पर थौलधार ब्लॉक के कंडीसौड़ में आयोजित बिखोत मेले में लोगों का हुजूम उमड़ा रहा। बिखोत मेले में बच्चों ने झूले और चरखी का आनंद उठाया और महिलाओं ने अपने जरूरत के सामान की खरीदारी की। मेले में पहुंचे लोगों ने भगवान नागराजा की डोली के दर्शन कर सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया।


भगवान तुंगनाथ व माता पार्वती को झूलाया झूला
ऊखीमठ/रुद्रप्रयाग। बैसाखी पर तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की गद्दी स्थल मार्कण्डेय मंदिर मक्कूठ में कटछपरी अनुष्ठान का आयोजन किया गया, जिसमें भगवान तुंगनाथ व माता पार्वती को पारंपरिक हिंडोले (झूला) में बैठाकर झूलाया गया।
प्रत्येक वर्ष बैसाखी के दिन होने वाले कटछपरी अनुष्ठान में सुबह ब्रह्मणों की ओर से भगवान तुंगनाथ की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद तुंगनाथ व माता पार्वती की भोग मूर्ति को तांबे के एक विशेष प्रकार के पात्र में बाहर लाकर हिंडोले (झूला) में विराजमान कर झूलाया गया। इसके बाद भोग मूर्तियों ने मंदिर की परिक्रमा की। कुछ देर बाद भगवान व माता पार्वती की भोग मूर्ति को एक बार फिर से मंदिर के गर्भ गृह में रखा गया। मंदिर के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित व मठापति राम प्रसाद मैठाणी ने बताया कि मंदिर में यह परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है। भक्त भगवान व देवी पार्वती को झूले में झूलाते हैं, जिसे कटछपरी भी कहा जाता है। अनुष्ठान में अजय आनंद नेगी, उमादत्त मैठाणी, माहेश्वर प्रसाद मैठाणी, जगदंबा प्रसाद मैठाणी, विजयभारत मैठाणी, शिव सिंह रावत आदि मौजूद थे।
श्रीनगर। बैसाखी पर्व पर देवलगढ़ स्थित गौरादेवी मंदिर परिसर में मेला हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां गौरादेवी को हिंडोला झूलाया। करीब चार माह मायके (सुमाड़ी) में रहने के बाद बैसाखी के दिन मां गौरादेवी ससुराल (बुघाणी) लौटतीं हैं। बैसाखी पर देवलगढ़ गौरादेवी मंदिर परिसर में मेला आयोजित किया गया। श्रीराजराजेश्वरी व गौरादेवी मंदिर में विशेष हवन, पाठ किया गया। इस दौरान देवी प्रसाद, मनोज काला, मुकेश काला, सुधीर बहुगुणा मंगल सिंह, विपिन चमोली, विमल काला आदि मौजूद थे।

मां नंदा की डोली ने किया स्नान
जखोली। बधाणीताल पर्यटन विकास समिति की ओर से आयोजित मेले में मां नंदा की डोली ने स्नान व नृत्य किया। दूसरे दिन कार्यक्रम का शुभारंभ एसडीएम/मेलाधिकारी देवमूर्ति यादव ने किया। मां नंदा की डोली ने रविवार को तड़के बधाणीताल में स्नान किया। बाद में शैलजा सांस्कृतिक कला मंच पौड़ी व त्रियुगीनारायण सांस्कृतिक कला मंच बधाणी के कलाकारों व स्कूली बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुति दी। देर शाम मां नंदा की डोली बधाणी गांव के भंडार गृह पहुंची। इस मौके पर ब्लाक प्रमुख राजकुमारी रावत, समिति के अध्यक्ष केदार सिंह मेंगलवाल, अर्जुन सिंह गहरवार, जिला पंचायत सदस्य महावीर सिंह रावत, कुलेंद्र रावत, प्रधान उम्मेद सिंह पंवार व संपूर्णानंद सेमवाल आदि मौजूद थे।
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