चंबा (टिहरी)। चंद्रमा में पानी की मौजूदगी के बाद अब वहां पर मौजूद प्राकृतिक संपदाओं पर शोध किया जा रहा है। उम्मीद जतायी जा रही है, कि चंद्रमा के वातावरण, सूर्य का प्रकाश, पानी के रूप सहित अन्य विषयों पर जल्द ही जानकारी मिल पाएगी। यह बात स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाही थौल में आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने कही।
सोमवार को स्वामी रामतीर्थ परिसर सभागार में उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यू-सैक) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उत्तराखंड के के तत्वाधान में उत्तराखंड में जल संसाधन प्रबंधन में रिमोट सेंसिंग और जीआईएस विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान के निदेशक डा. प्रकाश चौहान ने चंद्रयान मिशन की जानकारी देते हुए बताया कि चंद्रमा में पानी मौजूद है। मगर अब चंद्रमा में मौजूद प्राकृतिक संपदाओं पर शोध कार्य किया जा रहा है। उत्तराखंड अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के निदेशक डा. एमपीएस बिष्ट ने उत्तराखंड अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र की गतिविधियों और उपयोगिता की जानकारी दी। वैज्ञानिक डा. आशा थपलियाल ने जल संसाधन के प्रबंधन में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की उपयोगिता पर जानकारी दी। उन्होंने उत्तराखंड में हो रही भूगर्भीय घटनाओं, हिमनद और जलाशय के बारे में बताया। इस मौके पर स्वामी रामतीर्थ परिसर के निदेशक प्रो. आरसी रमोला, डा. संदीप बहुगुणा, डा. केसी पेटवाल, डा. शंकर लाल, डा. रविंद्र सिंह, डा. सुनैना, डा. आलोक और डा. मुकेश आदि मौजूद थे।