नई टिहरी। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए नई टिहरी, घनसाली और देवप्रयाग क्षेत्र के लोगों को अभी लंबा इंतजार करना होगा। क्योंकि 14 जनवरी से बौराड़ी जिला अस्पताल, सीएचसी बेेेलेश्वर और पीएचसी देवप्रयाग को पीपीपी मोड में संचालित करने के अपने वादे पर हिमायलन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल कालेज जौलीग्रांट खरा नहीं उतर पाया है। अस्पतालों में सेवाएं देने के लिए हिमालयन अस्पताल को अभी डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। 53 डॉक्टरों के सापेक्ष हिमालयन अस्पताल सिर्फ 8 डॉक्टरों को ही जिले के तीन अस्पतालों में तैनात करने में कामयाब हुआ है।
विश्व बैंक की मदद से जिला अस्पताल बौराड़ी, सीएचसी बेेेलेश्वर और पीएचसी देवप्रयाग को हिमालयन अस्पताल के साथ पीपीपी मोड में संचालित करने का निर्णय लिया था। अस्पतालों की बागडोर सरकार ने बीते अक्तूबर में हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल कालेज जौलीग्रांट को सौंप दी है। विवि के कुलपति डा. विजय धस्माना ने बीते नवंबर में जिला अस्पताल का निरीक्षण कर 14 जनवरी से तीनों अस्पतालों का विधिवत संचालन शुरू करने का दावा किया था, लेकिन तय तिथि के बाद भी पीपीपी मोड में संचालन शुरू न होने पर शुरूआती दौर में ही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
जिला अस्पताल, बेलेश्वर और देवप्रयाग में कार्यरत 22 डॉक्टरों का दूसरी जगह स्थानांतरण के आदेश भी हो चुके हैं, लेकिन लोगों की मांग पर सीएमओ डा. भागीरथी जंगपांगी ने नए डॉक्टरों की तैनाती न होने तक कार्यरत डॉक्टरों को कार्यमुक्त न करने का निर्णय लिया है। फिलहाल हिमालयन अस्पताल की ओर से जिला अस्पताल में आर्थोपैडिक सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, ईएनटी, बाल रोग और जनरल फिजिशियन, देवप्रयाग में दो और बेलेश्वर में एक कुल आठ डॉक्टरों की तैनाती की गई है।
पीपीपी मोड में सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देने के लिए डॉक्टरों की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। कुछ डॉक्टरों ने सेवाएं देनी शुरू कर दी है। अस्पताल परिसर में 63 केवी का विद्युत ट्रांसफार्मर लगना अभी शेष है। जल्द ही विधिवत तीनों अस्पतालों के संचालन की तिथि तय की जाएगी।
-एमएम माधवन, प्रोजेक्ट मैनेजर हिमालयन अस्पताल