कंडीसौड़ (टिहरी)। छाम-बल्डोगी झूला पुल वर्ष 2007 में टिहरी बांध की झील में डूब गया है, जिससे थौलधार और चिन्यालीसौड़ क्षेत्र की 50 हजार की आबादी को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि ग्रामीण जहां झूला पुल से एक से डेढ़ किमी पैदल चलकर आरपार हो जाते थे, वहीं अब 40 किमी का सफर करने को मजबूर हैं।
भागीरथी नदी पर टिहरी जिले के थौलधार और उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ ब्लाक के करीब 50 हजार आबादी के लिए राजशाही के दौरान छाम-बल्डोगी झूला पुल बनाया था, जिससे एक से डेढ़ किमी पैदल चलकर दोनों क्षेत्र के ग्रामीण आरपार होते थी। लेकिन वर्ष 2007 में पैदल पुल टिहरी बांध की झील में डूबने के कारण चिन्यालीसौड़ होते हुए करीब 40 किमी की दूर तय कर आवागमन करने को मजबूर हैं। हालांकि पुनर्वास निदेशालय ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए एक बोट लगाई है, बावजूद झील के घटते-बढ़ते जलस्तर के कारण बोट सेवा प्रभावित हो जाती है।
टिहरी-उत्तरकाशी जन विकास समिति के अध्यक्ष जय सिंह राणा, क्षेत्र पंचायत सदस्य शैलजा गुसाईं, भागचंद रमोला, मुशदी लाल सेमवाल, सुमेर सिंह पंवार आदि का कहना है कि पुल डूबने के कारण ग्रामीण 11 साल से आवागमन में परेशानी झेल रहे हैं। ग्रामीणों को कई बार पुल निर्माण का आश्वासन मिल चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी है।
कोट
ग्रामीणों की सुविधा के लिए बोट लगाई गई है। पुल निर्माण का अभी कोई प्रस्ताव लंबित नही है। पुल निर्माण संबंधी निर्णय केंद्र और राज्य सरकार के स्तर होना है। पुनर्वास निदेशालय इसके लिए सक्षम नही है।
-सुबोध मैठाणी, अधिशासी अभियंता अवस्थापना खंड पुनर्वास।