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शहर की आधी आबादी को सीवर लाइन से वंचित

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नई टिहरी। मास्टर प्लान शहर नई टिहरी की आधी आबादी को अभी भी सीवर लाइन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सीवर लाइन नहीं होने से कई स्थानों पर सीवर खुले में बह रहा है। हालांकि जल संस्थान ने क्षेत्रों में सोकपिट और सेफ्टी टैंक तो बनाए हैं, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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पुरानी टिहरी के डूबने के बाद विस्थापित शहर में नई टिहरी में मास्टर प्लान के तहत टीएचडीसी ने सीवर लाइन बिछवाई थी, लेकिन एम. ब्लॉक, 7बी, मुस्लिम मोहल्ले, ढुंगीधार और टिनशेड कालोनी में निकटवर्ती गांवों के विरोध के कारण सीवर लाइन नहीं बिछ पाई। जिससे यहां निवासरत परिवारों को सीवर की समस्या से जूझना पड़ रहा है। टीएचडीसी ने आनन-फानन में पेयजल योजना और सीवर लाइन वर्ष 2006 में जल संस्थान को हैंडओवर कर दी, जबकि उक्त क्षेत्रों में सीवर लाइन बिछाने के कार्य टीएचडीसी को पूरा कर हैंडओवर किया जाना चाहिए था। वर्तमान में जल संस्थान ने इन स्थानों पर सीवर के लिए सोकपिट व सेफ्टिक टैंक बनाए हैं। टैंक फुल होने के कारण सीवर खुले में बहता है। जल संस्थान के ईई सतीश नौटियाल ने बताया कि क्षेत्रों में तीन पंपिंग स्टेशन बनाए जाने की डीपीआर तैयार की है। सीवर को पंपिंग करे मेन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस पर करीब पांच करोड़ खर्च आएगा। विभाग ने डीपीआर टीएचडीसी को भेजी है, लेकिन बजट नही मिल पाया है।
शहर में सीवर लाइन बनाने की जिम्मेदारी टीएचडीसी की थी, लेकिन कई क्षेत्रों में लाइन नहीं बिछाई गई। 2016 में संयुक्त समिति ने क्षेत्रों में तीन पंपिंग स्टेशन बनाने को कहा था। इस पर पांच करोड़ खर्च आएगा। टीएचडीसी को कई बार पत्र लिखने के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
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सोनिका, जिलाधिकारी टिहरी
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