नई टिहरी। टीएचडीसी 2021 में एक हजार मेगावाट की पीएसपी (पंप स्टोरेज प्लांट) को राष्ट्र को सौंपने के लिए तेजी से प्रयास कर रही है। ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अहम मानी जा रही पीएसपी के निर्माण कर करीब चार हजार चार सौ दो करोड़ खर्च होंगे। परियोजना का 60 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है। पीएसपी के निर्माण से देश के कई राज्यों को बिजली मिलेगी। भूमिगत इस परियोजना का निर्माण नौ हजार 100 मीटर लंबी सुरंगें पहाड़ के अंदर बनाकर किया जा रहा है।
टिहरी बांध परियोजना 24 सौ मेगावाट की थी, जिसमें से एक हजार मेगावाट मुख्य बांध और 400 मेगावाट कोटेश्वर बांध से विद्युत उत्पादन हो रहा है। एक हजार मेगावाट की पीएसपी परियोजना का निर्माण 2011 से चल रहा है। पीएसपी का सिविल कार्य एचसीसी और हाइड्रो, इलेक्ट्रो मेकेनिकल कार्य जीई हाइड्रो फ्रांस एवं जीई पावर इंडिया कर रही है। वर्तमान में सिविल कार्य पूरे कर दिए गए हैं, जबकि अन्य कार्य जारी है। करीब तीन हजार करोड़ रुपये परियोजना पर खर्च हो चुके हैं, जबकि परियोजना की लागत चार हजार चार सौ दो करोड़ है। टिहरी बांध परियोजना के डाउनस्ट्रीम (नीचे की ओर) में स्थित कोटेश्वर बांध की झील से अपस्ट्रीम (ऊपर की ओर) में स्थित टिहरी बांध झील में जल को पंपिंग कर पहुंचाया जाएगा। इससे टरबाइनों को चलाकर विद्युत किया जाएगा। विद्युत उत्पादन ग्रिड की मांग के अनुसार होगा। पीएसपी केंद्र सरकार की बनने वाली पहली पंप स्टोरेज परियोजना है, जिससे 1000 मेगावाट विद्युत का उत्पादन किया जाएगा। टीएचडीसी पीएसपी का निर्माण दिसंबर 2021 तक पूरा करवाने के लिए तेजी से काम कर रही है। इसके निर्माण से राष्ट्र की विद्युत क्षमता में बढ़ेगी।
पीएसपी की खासियत
एक हजार मेगावाट की पीएसपी के निर्माण से कोई भी गांव विस्थापित, प्रभावित नही हो रहा है। यह परियोजना मुख्य बांध के अंदर ही करीब नौ हजार एक सौ मीटर की विभिन्न सुरंगें पहाड़ के अंदर बनाकर किया जा रहा है। साथ ही टिहरी और कोटेश्वर बांध से विद्युत उत्पादन से निकालने वाले पानी को रिसाईकिल कर विद्युत उत्पादन किया जाएगा।
पीएसपी की संरचनाएं
परियोजना का अपस्ट्रीम व्यास लगभग 21 मी., ऊंचाई 140 मी. है, डाउनस्ट्रीम व्यास 18 मी., ऊंचाई 80 मी. है। मुख्य पावर हाउस कैवर्न जिसकी चौड़ाई 25.4 मी., ऊंचाई 55 मी. एवं लंबाई 203 मी. है। 02 पूंछ रेस सुरंगें, जिनका ब्यास 9 मी. एवं लंबाई लगभग 1150 मी. है।
यह परियोजना बहुत ही महत्वपूर्ण है। पीएसपी परियोजनाएं ऊर्जा के क्षेत्र में ग्रिड की अमूल्य संपत्ति है। करीब 60 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है। दिसंबर 2021 तक पीएसपी का निर्माण पूरा कर राष्ट्र का समर्पित करने लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।
-एसआर मिश्रा, अधिशासी निदेशक टीएचडीसी इंडिया भागीरथीपुरम।