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इस साल रक्षाबंधन पर नहीं रहेगा भद्रा का साया

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विनोद चमोली
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चंबा (टिहरी)। इस साल भाई-बहन के पवित्र त्योहार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। ज्योतिष के मुताबिक भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए बहनें निश्चिंत होकर दिन-भर में किसी भी समय पर भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
श्रावण माह की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस बार रक्षाबंधन 26 अगस्त (रविवार) को विशेष संयोगों के साथ आ रहा है। रक्षाबंधन का एक आवश्यक नियम यह है कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती है। मगर इस साल अच्छा संयोग यह है कि 26 अगस्त को भद्रा सूर्योदय से पूर्व ही खत्म हो जाएगी, इसलिए बहनें निश्चिंत होकर दिन-भर में किसी भी समय भाइयों को राखी बांध सकती हैं। ज्योतिष के अनुसार इस साल पूर्णिमा तिथि एक दिन पहले शुरू होने के कारण ऐसा योग बन रहा है। इस साल पूर्णिमा तिथि 25 अगस्त शनिवार को शाम 3.16 से शुरू हो जाएगी। इसका समापन 26 अगस्त को शाम 5.25 बजे पर होगा। इसके चलते भद्रा का साया रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगा। वहीं ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि रक्षा सूत्र सिंथेटिक की जगह सूत का लाल धागा होना शुभ होता है। साथ ही रक्षासूत्र बांधते समय बहनों को इस मंत्र का वाचन भी अवश्य रूप से करना चाहिए। येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल। 26 अगस्त को आने वाले रक्षाबंधन के लिए बाजार भी सजने लगे हैं, जहां कई तरह की राखियां मौजूद हैं, बावजूद ज्योतिष के मुताबिक राखी के रूप में सूत का लाल धागा ही शुभ माना जाता है।
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कोट
भद्रा काल और सूतक में कोई भी मंगल कार्य नहीं किए जा सकते हैं। मगर सालों बाद इस बार रक्षाबंधन में सूर्योदय से पहले ही भद्रा समाप्त हो जाएगी। ऐसे में भाई-बहन दिनभर राखी बांध सकते हैं।
-पं. उदय शंकर भट्ट, पूर्व अध्यक्ष, उत्तराखंड विद्वत सभा।
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