नई टिहरी। आपदा और सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को हेलीकॉप्टर की सुविधा प्रदान कर रही सरकार जिले में कहीं भी अपना स्थायी हेलीपैड नहीं बना पाई है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से भेजे गए छह हेलीपैड बनाने के प्रस्ताव शासन में ठंडे बस्ते में पड़े हैं, जिससे प्रशासन के सामने हेली सेवा के लिए भागीरथीपुरम में टीएचडीसी और बादशाहीथौल में पुलिस के हेलीपैड के अलावा अस्थायी हेलीपैडों का सहारा लेने की मजबूरी बनी हुई है।
पहाड़ी जिलों में स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाएं बदहाली का दंश झेल रही हैं। इसकी कमी तब सबसे अधिक खलती है, जब किसी प्रकार की आपदा और वाहन दुर्घटनाओं में गंभीर घायलों को इलाज नहीं मिलने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर किया जाता है। लेकिन लंबे सफर में कई घायल रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। जनहानि कम करने के लिए सरकार हेली सेवा की सुविधा प्रदान कर रही है, लेकिन सरकार जिले में कहीं भी अपना स्थायी हेलीपैड नहीं बना पाई है। स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय में भी स्थायी हेलीपैड नहीं है। जिला प्रशासन की ओर से भिलंगना के बोंगा, घनसाली (पिलखी), धनोल्टी, कांडी बंग्लों की, कोटीकालोनी और धनोल्टी में स्थायी हेलीपैड बनाने के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। डीएम सोनिका का कहना है कि आपात स्थिति में किसी भी हेलीपैड का इस्तेमाल कर सकते हैं। कोटीकालोनी में जहां हेलीपैड प्रस्तावित है, वहां मलबा डालकर हाइट बढ़ाई जा रहा है। उसे जल्द तैयार किया जाएगा। अन्य स्थानों पर भी शीघ्र ही काम शुरू कराया जाएगा।