कंडीसौड़ (टिहरी)। टिहरी झील का जलस्तर बढ़ने पर तीन माह के इंतजार के बाद पुनर्वास विभाग ने बीते सोमवार से छाम-बैल्डोगी बोट सेवा शुरू कर दी है, जिससे जिले की गुर्साइं-नगुण पट्टी और उत्तरकाशी जिले की दिचली-गमरी पट्टी के दर्जनों गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। झील के आरपार बसे गांव के लोगों को अब अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए 36 किमी की अतिरिक्त दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
बांध की झील बनने से पहले थौलधार और दिचली गमरी क्षेत्र के दर्जनों गांवों लोग छाम-बैल्डोगी झूला पुल से आवागमन करते थे, लेकिन वर्ष 2005 में टिहरी बांध की झील बनने के बाद झूला पुल डूबने पर पुनर्वास निदेशालय ने लोगों को आवागमन के लिए बोट की सुविधा प्रदान की है। बीते आठ अप्रैल को टिहरी झील का जलस्तर कम होने पर पुनर्वास विभाग ने बोट सेवा बंद कर दी थी। ऐसे में थौलधार ब्लॉक और चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के दर्जनों गांवों के लोगों के सामने आवागमन की समस्या पैदा हो गई थी। बोट से हर दिन स्थानीय लोग छाम-बैल्डोगी के बीच नाते-रिश्तेदारी और बाजार में आवागमन करते हैं। बोट बंद होने से उन्हें वाया चिन्यालीसौड़ से कंडीसौड़ पहुंचने के लिए 36 किमी का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा था। इन दिनों हो रही बारिश से झील के जलस्तर में वृद्धि हुई है। झील का जलस्तर आरएल 779.10 मीटर तक पहुंच गया है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए झूला पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।