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बस दुर्घटना के बाद खुली बीआरओ की नींद

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नई टिहरी। ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर सूल्याधार में हुई बस दुर्घटना के बाद अब बीआरओ (बॉर्डर रोड आर्गेनाइजेशन) नींद से जागा है। कॉजवे और पैरापिट का जो निर्माण दो सालों से अधूरा पड़ा हुआ था उस पर शुक्रवार से काम शुरू कर दिया गया है। लोगों का कहना है कि यदि बीआरओ पहले ही खराब सड़क पर सुरक्षा इंतजाम कर देता, तो 14 लोगों की जान बच सकती थी।
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बृहस्पतिवार को ऋषिकेश-गंगोत्री हाईवे पर रोडवेज की बस सूल्याधार में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। बस में सवार 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 17 घायल हो गए थे। प्रारंभिक तौर पर सूल्याधार में बीआरओ की ओर से दो वर्षों से निर्माणाधीन कॉजवे को दुर्घटना की मुख्य वजह मानी जा रही है। वहीं चंबा से धरासू तक मार्ग पर जगह-जगह मलबा, पत्थर और रेत पसरा हुआ है।
डीएम सोनिका ने कहा यदि बस दुर्घटना की मजिस्ट्रीयल जांच में बीआरओ के खिलाफ रिपोर्ट आई तो मुकदमा दर्ज करने से पीछे नहीं हटेंगी। तीन जुलाई को कंडीसौड़ में आयोजित तहसील दिवस में भी मार्ग की दुर्दशा पर बीआरओ को निर्देश दिए थे। साथ ही कई बार इस संबंध में पत्र भी लिखे हैं, बावजूद बीआरओ लापरवाह बना हुआ है। एसडीएम सदर चतर सिंह चौहान को जांच अधिकारी बनाया गया है। एक पखवाड़े में विस्तृत रिपोर्ट आ जाएगी। बस की फिटनेस जांच रिपोर्ट भी मंगाई जा रही है।
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देवदूतों को जिला प्रशासन करेगा सम्मानित
सूल्याधार बस दुर्घटना के बाद रेस्क्यू करने के लिए देवदूत बनकर आए जुगड़ गांव के प्रधान हरि प्रसाद सकलानी के अलावा डडूर, दिखोलगांव, किरगणी, धारकोट, नकोट के प्रधान और स्थानीय लोगों को जिला प्रशासन प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेगा।

आरआई ने की दुर्घटनाग्रस्त बस की जांच
सूल्याधार में दुर्घटनाग्रस्त हुई रोडवेज बस की उत्तराखंड परिवहन निगम ने प्रारंभिक तौर पर तकनीकी जांच शुरू कर दी है। उत्तरकाशी में तैनात क्षेत्रीय निरीक्षक (आरआई) प्रवीण कुमार ने शुक्रवार को सूल्याधार पहुंचकर तकनीकी पहलुओं की जांच की। दुर्घटनाग्रस्त बस की फिटनेस और टायर गंजे होने पर सवाल उठाए जा रहे थे। जांच में आरआई ने टायर सही पाए। आरआई ने कहा जांच पूरी होने के बाद किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।

परिजनों को सौंपे शव
नई टिहरी। सूल्याधार बस दुर्घटना में मृत 13 लोगों के शव पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने परिजनों को सौंप दिए हैं, जबकि एक मृत साधु स्वामी प्रकाशानंद तीर्थ (38) हरिहर कैलाशपीठ मुनिकीरेती का शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। साधु मूल रूप से पश्चिम बंगाल निवासी है, जो मुनिकीरेती में रहता था। मृतक साधु के जेब से मिले मोबाइल के आधार पर पुलिस ने उसके परिजनों से संपर्क किया। मृतक के छोटे भाई तपेन सिंह ने पुलिस को बताया कि सन्यास से पहले साधु का नाम प्रदीप था। वे शव लेने आ रहे हैं।
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