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मौसम परिवर्तन के संबंध में अध्ययन शून्य है हिमालयी क्षेत्र: डा. गुप्ता

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नई टिहरी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग केंद्र सरकार की पहल पर औद्यानिकी एवं वानिकी विवि के रानीचौरी परिसर में ‘मौसम परिवर्तन और पारिस्थिक तंत्र’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि मौसम परिवर्तन से बहुत सारे दुष्प्रभाव हमारे सामने आए हैं, लेकिन उतनी ही कमी हिमालय क्षेत्र की मौसम परिवर्तन संबंधी अध्ययनों में आई है।
रानीचौरी परिसर में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सलाहकार डा. अखिलेश गुप्ता, विशिष्ठ अतिथि गढ़वाल विवि के पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह, कुलपति प्रो. सीएम शर्मा ने किया। डा. अखिलेश गुप्ता ने कहा कि मौसम परिवर्तन के मद्देनजर सभी हिमालयी विवि को केंद्र में रखकर विभाग ने महत्वकांक्षी शोध कार्यक्रम प्रस्तावित किया है। कहा कि अन्य राज्यों की भांति उत्तराखंड के भी किसी एक विवि को हिमालयी अध्ययन के लिए विशिष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने युवा वैज्ञानिकों से हिमालयी क्षेत्र में मौसम परिवर्तन के प्रभावों की व्यापकता से अध्ययन करने का आह्वान किया। औद्यानिक और वानिकी विवि के कुलपति प्रो. सीएम शर्मा ने प्रदेश के वनों की पारिस्थिक तंत्र सेवा और मौसम परिवर्तन के बारे में जानकारी दी।
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कार्यशाला में डीन प्रो. एसके गुप्ता, कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. डीके नौटियाल, उत्तराखंड आवासीय विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी, डा. रविंद्र पानीगृही, प्रो. वाईपी सुंद्रियाल, प्रो. पी नौटियाल, जीबीपंत हिमालय पर्यावरण संस्थान के डा. आरसी सुंद्रियाल, प्रो. पीसी तिवार, डा. दिनेश शर्मा, प्रो. विनोद खंडूड़ी, डा. अमोल वशिष्ठ, डा. अरविंद बिजल्वाण, डा. आरएस बाली, डा. दीपा रावत आदि मौजूद रहे।
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