नैनबाग (टिहरी)। जौनपुर क्षेत्र में मौण मेले की तैयारियां जोरों पर है। बृहस्पतिवार को ढोल-दमाऊं, रणसिंघा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के मौण मेले का आगाज होगा। क्षेत्र के लोग सामूहिक रूप से अगलाड नदी में उतरकर मछलियों का आखेट करेंगे।
मौण मेला मनाए जाने की अनूठी परंपरा है। टिहरी नरेश रहे नरेंद्र शाह ने सन 1811 में स्वयं अगलाड नदी में आकर मौण डाला था। तब से मेले को मनाए जाने की परंपरा है। मौण मेले में सिलवाड, छैज्यूला, अठाजुला, लालूर, इडवालस्यूं जौनसार, उत्तरकाशी, मसूरी सहित आसपास के 114 गांव के लोग भाग लेते हैं। प्राकृतिक जड़ी टिमरू की बाहरी छाल को सूखाकर मौण का पाउडर तैयार किया जाता है। उसे घराट (पन चक्की) में पीसकर बारीक पाउडर तैयार किया जाता है। पाउडर को स्थानीय भाषा में मौण कहा जाता है। मौण को नदी में डालने से मछलियां पकड़ने में आसानी होती है। इस बार मौण निकालने और इसे नदी में डालने की बारी सिलगांव पट्टी के लोगों की है। कुंवर सिंह भंडारी, डा. विरेंद्र सिंह रावत, जयपाल राणा, सूरत सिंह रावत ने बताया कि मौण मेले की तैयारियां पूरी कर ली गई है।