नई टिहरी। टिहरी झील में रोमांच के सफर पर ब्रेक लग गया है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शनिवार से टिहरी झील विशेष क्षेत्र पर्यटन विकास प्राधिकरण (टाडा) ने बोटों का संचालन बंद कर दिया है। झील में बोटिंग करने आए पर्यटकों को निराश लौटना पड़ा। बोटों का संचालन बंद होने से बोट संचालकों में मायूसी छाई हुई है।
घनसाली पिलखी से लेकर उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ तक 42 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली टिहरी झील में 10 दिसंबर 2014 से बोटों का संचालन शुरू हुआ था। वर्तमान समय में झील में 56 बोट, 8 जेटस्की, एक-एक जेड अटैक और जेड बोट संचालित हो रही है। इन दिनों बोटिंग का पीक सीजन चल रहा है। प्रतिदिन 400 से लेकर 500 लोग झील में रोमांच का सफर करने पहुंच रहे थे। सरकार की ओर से जल क्रीड़ा और साहसिक खेलों के लिए नियम तय न होने का खामियाजा अब बोट संचालकों को भुगतना पड़ रहा है। झील में बोटों का संचालन बंद होने से अब लगभग 200 बोट संचालकों के सामने आर्थिकी का संकट खड़ा हो गया है।
एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 21 जून को प्रदेश सरकार को दो सप्ताह में जल क्रीड़ा के लिए उचित नियम और नीति तैयार करने को कहा है। न्यायालय के आदेश पर शनिवार से टाडा ने टिहरी झील में बोटों का संचालन बंद कर दिया है। बोटों का संचालन बंद होने से झील में वीरानी छाई हुई है। टिहरी झील बोट यूनियन के संरक्षक कुलदीप पंवार का कहना है कि जल क्रीड़ा के लिए नियम तय करने के लिए पिछले चार-पांच सालों में सरकार को कई बार सुझाव भेजें। भाजपा और कांग्रेस सरकारों ने कभी भी मामले में गंभीरता से विचार नहीं किया।
कोट
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद टिहरी झील में बोटिंग गतिविधियां बंद कर दी गई है। शासन के निर्देशों के बाद ही दोबारा से बोटों का संचालन शुरू किया जाएगा। बोट संचालकों को अग्रिम आदेश तक किसी भी दशा में बोट न चलाने को कहा गया है।
-चतर सिंह चौहान, अपर मुख्य कार्याधिकारी टाडा टिहरी
टिहरी झील में जल क्रीड़ा संबंधी सभी गतिविधियां गोवा और मुंबई की तर्ज पर चल रही है। गोवा और मुंबई में समुद्र है, जबकि टिहरी झील में स्टिल वाटर है। ऐसे में यहां जल क्रीड़ा के लिए गोवा और मुंबई की नकल नहीं की जा सकती है। झील में बोट संचालन लाइसेंस देने का अधिकार जिला पंचायत को है। क्योंकि जिला पंचायत ने ही बोट संचालन की नियमावली और एक्ट तैयार किया है, लेकिन टाडा मनमानी कर बोट संचालन का लाइसेंस जारी कर रहा है।
-देवेंद्र दुमोगा, पूर्व विधिक सलाहकार टाडा