चंबा (टिहरी)। अब पहाड़ में बादल फटने की घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकेगा। इसके लिए स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल में बादलों की गतिविधियों पर निगरानी रखने के लिए वेधशाला स्थापित किए जाने का काम शुरू हो गया है। उम्मीद की जा रही है कि भारत की इस दूसरी वेधशाला में आसमान में पानी वाले बादलों की पहचान कर बादल फटने की घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बादल फटने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसे देखते हुए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और आईआईटी कानपुर के सहयोग से स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल में बादलों की निगरानी से संबंधित वेधशाला खोले जाने का काम शुरू हो गया है। देश में इस तरह की पहली वेधशाला महाराष्ट्र के महाबलेश्वर (पुणे) में है। दूसरी वेधशाला चंबा के बादशाहीथौल में तैयार होने जा रही है।
वेधशाला में उच्च हिमालयी क्षेत्र में बादलों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। इसकी सटीक जानकारी के लिए हाईटेक उपकरणों के साथ ही एक मौसम केंद्र भी स्थापित किया जा रहा है। मौसम केंद्र में बरसात, तापमान, हवा की गति, हवा की दिशा पर नजर रखी जाएगी। एसआरटी परिसर निदेशक प्रो. आरसी रमोला का कहना है कि वेधशाला में बादल फटने की घटनाओं पर पूरी निगरानी की जाएगी।
कोट
वेधशाला में बादलों की गतिविधियों की मॉनीटरिंग की जाएगी। इसमें हवा की गति और दिशा पर नजर रखकर बादल फटने की घटनाओं पर निगरानी रखी जाएगी। जुलाई से वेधशाला विधिवत काम करना शुरू कर देगी।
-डा. आलोक सागर गौतम, मुख्य अन्वेषक, वेधशाला