नई टिहरी। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों ने परियोजना प्रबंधन पर पूर्व में हुए करार के विपरीत कार्य करने का आरोप लगाया है। कंपनी प्रबंधन की इस मनमानी के खिलाफ मंगसू के ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट परिसर में बेमियादी धरना शुरू किया है।
कलक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे ग्रामीणों ने बताया कि जीवीके कंपनी ने बेवजह कई लोगों को नौकरी से बाहर कर दिया है। गुगली गांव की लीज पर ली गई भूमि का भुगतान किए बगैर लीज समाप्त कर दी। भूस्वामियों को चार साल का पैसा नहीं दिया गया है। कंपनी ने घाट तक सड़क बनाने का वादा भी पूरा नहीं किया है। कंपनी ने बजरी और कंकरीट के कारण बेकार हुई मंगसू की जमीन का 15 लाख रुपये प्रति खाताधारक देने पर सहमति जताई थी, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं दिया गया है। थलीसैण (धारी) गांव का भी पुनर्वास नहीं किया गया है और न ही रोजगार दिया जा रहा है। धरना देने वालों में उत्तराखंड संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के प्रदेश संयोजक दौलत कुंवर, सोहन लाल मुयाल, विजयपाल शाह, प्रेमलाल, शंकर लाल, दुर्गा लाल, सोनू, वीरेंद्र लाल, सोहन लाल, मोहनलाल, कुलदीप, मुन्ना लाल, बृजमोहन, रमेश, रामलाल, धुमी लाल और राजेंद्र मुयाल आदि शामिल थे।