नई टिहरी। कोटेश्वर बांध परियोजना में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने समाज में व्याप्त बुराइयों पर खूब तंज कसे। कवि सम्मेलन का शुभारंभ हास्य कवि अरुण जैमिनी ने ‘सभी सदी में ढूंढते रह जाओगे, आंखों में पानी दादी की कहानी’, प्यार के दो पल नल नल में जल, परोपकारी बंदे’, और ‘अर्थी को कंधा ढूंढते रह जाओगे’ जैसी कविताओं से किया।
टीएचडीसी इंडिया कोटेश्वर बांध परियोजना में आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ कोटेश्वर बांध परियोजना के महाप्रबंधक पीके अग्रवाल ने किया। बुलंदशहर से आए कवि डा. अर्जुन सिसौदिया ने ‘दिलों में देश का जज्बा अजब तूफान रखते हैं, बर्तन पे सौदा होने का सभी अरमान रखते हैं...’। कवि बलजीत कौर ने ‘किसी को चाह लो तो चाहत हो जाती है, अपना बना लो तो आदत हो जाती है...’। दिल्ली के विनोद पाल ने ‘आपके लिए चंद कतरे लहू के लाया हूं, खुद मुरझा गया हूं पर फूल खुशबू के लाया हूं’,। दीपक गुप्ता ने ‘कैसी आजादी है यहां सवेरों से डर लगता है, जब से लुटे उजालों में अंधेरों से डर लगता है...’। इस मौके पर अपर महाप्रबंधक डी मणी, संजीव आर, उप महाप्रबंधक एके घिल्डियाल, बीके सिन्हा, पूनम अग्रवाल, सीमांत पंत, जेपी गोस्वामी, बीर सिंह, बीरेंद्र सिंह मियां, आरडी ममगाईं आदि मौजूद थे।