नई टिहरी। घाटे में चल रहे टिहरी सहकारी दुग्ध संघ के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगेे हैं। छह माह से दुग्ध उत्पादकों को भुगतान नहीं मिलने पर आर्थिक तंगी से जूझ रहे ग्रामीणों ने जल्द पैसा नहीं मिलने पर दूध की सप्लाई बंद कर संघ के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
सहकारी दुग्ध संघ (आंचल डेरी) से जिले की 130 समितियों के माध्यम से 10 हजार पशुपालक जुड़े हैं, जो पशुपालन कर संघ को दूध की सप्लाई दे रहे हैं। लेकिन वर्षों से घाटे में चल रहा दुग्ध संघ दूध उत्पादकों को छह माह का भुगतान नहीं दे पाया है, जिससे उत्पादकों का संघ पर 70 लाख रुपये बकाया चढ़ गया है। उत्पादक महावीर सिंह गुनसोला और जगदंबा प्रसाद सेमवाल ने बताया कि दूध का भुगतान नहीं मिलने से सैकड़ों पशुपालकों को भारी आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है।
कोट
टिहरी सहकारी दुग्ध संघ पर सात करोड़ की देनदारी है। 28 लाख रुपये दून डेरी पर बकाया है। हालांकि 32 लाख रुपये टिहरी संघ को भी उनका भुगतान करना है। काश्तकारों का पिछले वर्ष मार्च, अप्रैल, मई, जून और इस वर्ष फरवरी, मार्च का बकाया चल रहा है।
- एके सिंह, प्रभारी प्रबंधक दुग्ध संघ नई टिहरी।