नई टिहरी। अपने जीवन में मैने एक बड़ी बात सीखी हम चीजों को जितना मुश्किल समझते हैं, वह उतनी होती नहीं है। जब हम पूरे मन से किसी काम करते हैं, तो वह हो जाता है। यह कहना है टिहरी जिले की डीएम सोनिका का।
सोनिका ने वर्ष 2005 में बतौर वैज्ञानिक डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) देहरादून से करियर की शुरूआत की थी। पिता का सपना था कि बेटी आईएएस बने। इसी सपने को पूरा करने के लिए नौकरी के दौरान वर्ष 2010 में यूपीएससी की परीक्षा पास कर सोनिका आईएएस के लिए चुनी गई। वर्तमान में वह टिहरी की डीएम हैं। वह मूलरूप से राजस्थान के संवाईमान सिंह की रहने वाली हैं। प्रारंभिक शिक्षा मुंबई की केंद्रीय विद्यालय से हुई हैं। इसके बाद उन्होंने मुंबई आईआईटी में शिक्षा-दीक्षा ली। पिता राजस्व विभाग में आयुक्त हैं, जबकि मां गृहणी हैं।
डीएम रहते हुए उन्होंने जिले में 555 मेडिकल सेवा और टेलीमेडिसीन सेवा शुरू की है। उनकी इस अभिनव पहल की पीएम नरेंद्र मोदी ने भी सराहना की है। टेलीमेडिसीन सेवा को बाद में प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में संचालित करने का निर्णय लिया। जिले की कोई भी बालिका स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए टोल फ्री न. 555 सेवा पर कंसलटेंट की मदद से जानकारी ले सकती हैं। उनकी पहल पर स्कूलों में सिनेटरी पैड बांटने की व्यवस्था की गई है।
डीएम सोनिका का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बालिकाएं पढ़ने में तो अव्वल हैं, लेकिन परिजनों को उन्हें काम के बोझ तले दबाने के बजाय उनका हौसला पढ़ाना चाहिए। उनका मानना है कि डीएम सबसे चुनौती के पद हैं। संवेदनशील पद पर कार्य करने के लिए शासन-प्रशासन के अलावा गरीब और असहाय लोगों की बातें सुनकर उनको सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाना और चुनौतियों से निबटने का साहस होना जरूरी है।