नई टिहरी। पांच मार्च से शुरू होने वाली उत्तराखंड बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर परीक्षा की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाए है। कहा सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की बात कह रही है, लेकिन जनवरी में हुए मासिक टेस्ट के प्रश्नपत्र व्हाट्स एप पर भेजे गए। सोशल मीडिया में प्रश्न पत्र भेजने से गोपनीयता और विश्वसनीयता कहां रह गई है।
डीएम सोनिका की अध्यक्षता में बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। डीएम ने कहा कि प्रश्न पत्रों की रख-रखाव की जिम्मेदारी कस्टोडियन, केंद्र प्रभारी की होगी। उड़नदस्तों की नौ टीमें गठित कर दी गई है। सेेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर दी गई है। कहा कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए सरकार ने कक्षा छह से 12 तक प्रत्येक माह के अंतिम सोमवार या मंगलवार को मासिक टेस्ट की तिथि निर्धारित की है। अगले माह की सात तारीख तक डीएम के माध्यम से टेस्ट की प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। जीआईसी नागरजाधार बमुंड के प्रधानाचार्य एपीएस पुंडीर ने कहा कि यह अव्यवहारिक और ऊपर से थोपा गया फैसला है।
शिक्षकों ने बताया कि इस वर्ष गृह परीक्षाएं संपन्न हो चुकी है। ऐसे में छात्रों को कैसे दोबारा स्कूल बुलाकर मासिक टेस्ट लिए जाए। अधिकांश प्रधानाचार्यों ने इसका विरोध किया। मुख्य शिक्षा अधिकारी दिनेश चंद्र गौड़ ने बताया कि जिले में 153 परीक्षा केंद्रों पर 25 हजार 401 छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करेंगे। बैठक में एसएसपी विमला गुंज्याल, डीईओ माध्यमिक एसपी सेमवाल, बेसिक सुदर्शन बिष्ट, डायट के प्राचार्य चेतन प्रसाद नौटियाल उपस्थित रहे।