नई टिहरी। जंगल बचाने की वन विभाग की मुहिम ग्रामीणों के सहयोग से धीरे-धीरे सफल हो रही है। जिले में दस वर्षों में वनाग्नि की घटनाओं में कमी आई है। वर्ष 2009 में जहां 370 वनाग्नि की घटनाएं हुई थी, वह घटकर 2017 मेें 78 रह गई।
टिहरी जिले में दो लाख 31 हजार 517.47 हेक्टेयर वनक्षेत्र है, जिनमें से 15 हजार 864.50 हेक्टेयर आग की दृष्टि से संवेदनशील है। जिले में 139 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं, जिनमें 568 कर्मियों को जिम्मेदारियां दी गई है। फायर लाइनों की मरम्मत, वायरलेस सुदृढीकरण, फायर ड्रिल, जिला मुख्यालय में मास्टर कंट्रोल रूम, डाइजर, गजा, उनियालगांव, अखोड़ीसैण, लंबगांव, प्रतापनगर, घनसाली, चमियाला, विनयखाल आदि स्थानों पर कंट्रोल रूम बनाए हैं, जबकि टिहरी रेंज के सारज्यूला, सिवाली पातल, पवांली में वाच टावर स्थापित किए हैं। प्रभागीय वनाधिकारी डा. कोको रोसे का कहना है कि ग्रामीणों के सहयोग से वनाग्नि दुर्घटनाओं में कमी आई है। उम्मीद है इस बार भी वनाग्नि दुर्घटनाओं को रोकने में विभाग सफल रहेगा।