घनसाली (टिहरी)। भिलंगना ब्लॉक के सीमांत गांव गेंवाली को दीनदयाल उपाध्याय विद्युत ज्योति योजना के तहत ऊर्जा निगम ने एक माह पूर्व गांव में बिजली पहुंचाने का दावा किया था, लेकिन हकीकत यह है कि महीनेभर पहले सोमेश्वर मंदिर तक टेस्टिंग के आधे घंटे बाद से बत्ती गुल है।
गेंवाली गांव तक बिजली पहुंचाने के लिए जखाणा से गेंवाली तक पांच किमी लंबी विद्युत लाईन स्वीकृत के बाद लाइन बिछाने में आड़े आ रहे चार हेक्टेअर जंगलों के पातन के ऊर्जा निगम ने वन विभाग को 70 लाख रुपये का भुगतान किया है। बावजूद वन विभाग ने पेड़ों का पातन नहीं किया, जिससे ऊर्जा निगम ने भी जुकाणी से बमोला तक दो किमी में हरे पेड़ों पर ही तार बांध दिए। एक माह पहले टेस्टिंग की खानापूर्ति करने के बाद से लाइन से सप्लाई नहीं दी जा रही है। तब से ही गांव में खींची गई विद्युत लाइन शो-पीस बनी हुई है। निगम का गांव तक बिजली पहुंचाने का दावा हवाई साबित हुआ है। प्रधान बचन सिंह रावत, शूरवीर सिंह, सुरेश सिंह, अमनदीप, मनमोहन, राहुल बिष्ट, मक्खन सिंह, नारायण सिंह ने बताया कि एक माह पहले टेस्टिंग के बाद से तारों में करंट नहीं दौड़ पाया है। बिजली पहुंचने की आस में कई लोगों ने कनेक्शन के लिए भी आवेदन किए थे, लेकिन अभी तक सब हवा हवाई साबित हुआ है। रेंज अधिकारी एसएस नेगी का कहना है कि गेंवाली गांव के लिए बिछाई गई विद्युत लाईन में आड़े आ रहे 31 हरे पेड़ों का छपान कर पातन किया गया है। अब कहीं भी पेड़ लाइन के लिए अवरोधक नहीं है। ईई विद्युत वितरण खंड अरुण कांत का कहना है कि गांव में बिजली नहीं पहुंचने की कोई शिकायत नहीं मिली है। ईई ऊर्जा निगम राकेश कुमार का कहना है कि गेंवाली की विद्युत लाइन अभी हमारे हैंडओवर नहीं हुई है, जिससे गांव में सप्लाई के बारे में जानकारी नही है।