नई टिहरी। दहेज के लिए पत्नी को जलाकर मौत के घाट उतारने वाले हत्यारे पति को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीना अग्रवाल की अदालत ने उम्र कैद और सास, ससुर को सात-सात साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है, जबकि एक आरोपी को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है।
उत्तरकाशी जिले के धनेटी निवासी सुरेश भट्ट ने प्रतापनगर ब्लाक की पट्टी उपली रमोली पट्टी के मुखेम में अपनी विवाहिता बहन सरिता की हत्या की रिपोर्ट थाना लंबगांव में दर्ज करवाई थी। उन्होंने 19 जुलाई 2015 को थाने में दी तहरीर में बताया था कि उनकी बहन की शादी 2010 में मुखेम निवासी शैलेंद्र भट्ट के साथ हुई थी, लेकिन शादी के बाद से ही मृतका का पति शैलेंद्र, ससुर घनश्याम प्रसाद, सास सुशीला देवी, ननद दिनेशी देवी, किरन दहेज में मोटर साइकिल से लेकर अन्य सामान लाने के लिए प्रताड़ित एवं मारपीट करते रहते थे। इसकी शिकायत कई बार मृतका ने मायके वालों को भी बताई थी, लेकिन हर बार ही मायके वाले उसे समझा-बुझाकर लौटा देते थे। ससुराली अपनी हरकतों से बाज नहीं आए और मृतका के साथ मारपीट कर मायके भगा दिया। सरिता डेढ़ साल से अपनी दो बच्चियों के साथ मायके में रह रही थी। मौत से एक माह पहले उसका पति शैलेंद्र उसे लेने धनेटी गया और उसे अपने घर मुखेम ले आया। इस दौरान उसने सरिता के नाम पर जमा कन्याधन योजना की धनराशि निकाल ली और 16 जुलाई 2015 को अपने ही घर में आग लगाकर जला दिया। दो दिन बाद 18 जुलाई को मायके पक्ष को सरिता की तबियत खराब होने की सूचना दी गई। 19 जुलाई को मायके वाले मुखेम पहुंचे, तो वहां सरिता अदजली पड़ी थी। परिजन उसे जिला उत्तरकाशी ले गए जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
तहरीर के आधार पर थाना पुलिस ने मामले की विवेचना करते हुए सभी आरोपियों के विरुद्ध छह अक्तूबर 2015 को आरोप पत्र दाखिल किया, लेकिन सुनवाई के दौरान 15 फरवरी 2016 में न्यायालय ने किरन को दोष मुक्त किया। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद नौ फरवरी को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीना अग्रवाल की अदालत ने अभियुक्त शैलेंद्र भट्ट को धारा-304 बी के तहत आजीवन कारावास, 25 हजार का अर्थदंड, घनश्याम प्रसाद, सुशीला देवी को सात-सात साल की सजा और पांच-पांच हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई, जबकि धारा-3 दहेज प्रतिषेध के तहत तीनों अभियुक्तों को पांच-पांच साल और धारा-4 दहेज प्रतिषेध में एक-एक वर्ष की कठोर कारावास की सजा और अर्थदंड से दंडित किया है। साथ ही आरोपी दिनेशी देवी के विरुद्ध ठोस साक्ष्य न होने के कारण दोषमुक्त किया। अभियोजन के ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता वेणीमाधव शाह ने पैरवी की।