चंबा (टिहरी)। पालिका क्षेत्र में हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद निराश्रित पशुओं के लिए शरण गृह न बनाए जाने के मामले का उत्तराखंड गोसेवा आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने पालिका को उच्च न्यायालय के आदेशों का सख्ती से पालन किए जाने का निर्देश दिया है।
नगर क्षेत्र में गोवंश संरक्षण अधिनियम 2007 का दस सालों बाद भी सख्ती से पालन नहीं किया जा रहा है। उच्च न्यायालय ने भी 27 अक्तूबर 2016 को निराश्रित पशुओं के लिए छह माह के भीतर सभी स्थानीय निकायों को निराश्रित गोवंश और पशुओं के लिए गोशाला या शरणगृह बनाने के आदेश दिए थे। मगर उच्च न्यायालय के आदेश के एक साल से भी अधिक समय गुजर जाने के बावजूद पालिका क्षेत्र में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है, जिस पर पिछले दिनों स्थानीय निवासी विजेंद्र धनोला ने उत्तराखंड गो सेवा आयोग को शिकायती पत्र भेजा था, जिस पर गोसेवा आयोग अध्यक्ष नरेंद्र रावत की ओर से चार जनवरी को पालिका के अधिशासी अधिकारी को पत्र भेजकर उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने के निर्देश जारी किए हैं।