नई टिहरी। मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या पर इस बार श्रद्धालुओं को देवप्रयाग, हरिद्वार, इलाहाबाद और गंगा सागर में डुबकी लगाने के लिए भरपूर जल मिलेगा। पर्व को देखते हुए टिहरी बांध प्रशासन ने 240 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़ना शुरू कर दिया है।
माघ माह में देवप्रयाग, ऋषिकेश, हरिद्वार, इलाहाबाद और गंगा सागर समेत कई तीर्थ स्थलों पर गंगा स्नान किए जाने की परंपरा है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 16 जनवरी को मौनी अमावस्या, 22 जनवरी को वसंत पंचमी और 31 जनवरी को माघ पूर्णिमा का त्योहार है। इस बार बारिश नहीं होने से नदियों के जलस्तर में काफी गिरावट आई है। इस स्थिति को लेकर टिहरी बांध प्रशासन भी चिंतित है। टिहरी बांध से वर्तमान में ग्रिड डिमांड के अनुसार 9.5 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन प्रतिदिन हो रहा है। बुधवार को झील का जलस्तर 808.10 आरएल मीटर दर्ज किया गया। भागीरथी से 30 क्यूमेक्स और भिलंगना में मात्र नौ क्यूमेक्स पानी दर्ज किया गया। बांध प्रशासन जहां पहले 153 क्यूमेक्स पानी छोड़ रहा था, वहीं अब उसने 240 क्यूमेक्स पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। टीएचडीसी के महाप्रबंधक वीके बडोनी ने बताया कि मकर संक्रांति के स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की भावनाओं को देखते हुए बांध प्रशासन ने टिहरी बांध झील से अलग से पानी छोड़ने का पूरा खाका तैयार कर लिया है। फिलहाल मकर संक्रांति पर गंगा स्नान में श्रद्धालुओं के लिए जल की कमी न हो, इसके लिए बांध प्रशासन 240 क्यूमेक्स अतिरिक्त पानी छोड़ रहा है।