नई टिहरी। टिहरी बांध की झील बनने के कारण आवागमन में 11 सालों से परेशानी झेल रहे प्रतापनगर वासियों को वर्ष 2018 में नई सौगात मिल सकती है। चांठी-डोबरा पुल का काम युद्धस्तर पर है। सरकार ने छह माह बाद कोरियाई कंसलटेंस का अनुबंध बढ़ाकर 15 करोड़ 36 की स्वीकृति दी है। वर्तमान में 20-20 टन के सात रस्से (रोप) आरपार हो चुके हैं, जबकि अन्य 17 रस्सों को खिंचने का काम जारी है।
प्रतापनगर की दो लाख आबादी को आवागमन में सुविधा के लिए वर्ष 2006 से चांठी-डोबरा में झील के ऊपर 760 मीटर लंबा भारी वाहन पुल बन रहा है। पूर्ववर्ती सरकार ने अगस्त 2015 में कोरियाई कंसलटेंस से डिजायन तैयार कर फरवरी 2016 में कोरिया के इंजीनियरों की देखरेख में काम शुरू करवाया था। कोरियाई कंसलटेंस के दो इंजीनियर, एक मैनेजर, दो सुपरवाइजर समेत दो-दो, छोटे, बड़े वाहन कार्यदायी संस्था प्रिल वीकेजीए एमबीजेड को डिजायन के अनुसार पुल बनाने मेें तकनीकी सहयोग कर रहे हैं। इसके एवज में लोनिवि प्रत्येक माह कंसलटेंस को 20-25 लाख भुगतान कर रहा है।
31 अगस्त 2017 में कंसलटेंस का अनुबंध पूरा हो गया है। लोनिवि ने अनुबंध बढ़ाने को जुलाई में सरकार को प्रस्ताव भेजा था, जिस पर करीब 15 करोड़ 36 लाख खर्च होने है। अब सरकार ने 26 दिसंबर को कंसलटेंस का अनुबंध जून 2018 तक बढ़ाकर धनराशि भी स्वीकृत कर दी है। साथ ही छह दिसंबर से शुरू हुए पुल के रस्से (रोप) खिंचने का काम तेजी से किया जा रहा है। वर्तमान में 702-702 मीटर लंबे 20 टन के सात रोप को आरपार किया जा चुका है, जबकि अन्य अवशेष 17 रोप को खिंचने का काम दो-तीन माह के अंदर पूरा हो जाएगा।
कोरियाई कंसलटेंस का अनुबंध बढ़ाकर सरकार ने 15 करोड़ 36 की स्वीकृति जारी कर दी है। अनुबंध बढ़ने से पुल निर्माण में तेजी आएगी। वर्तमान में सात रस्सों को आरपार किया जा चुका है।
-एसएस मखलोगा, सहायक अभियंता चांठी-डोबरा प्रोजेक्ट लोनिवि।