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नैनबाग-मूसरी एनएच भी वैली ब्रिज के भरोसे

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नैनबाग (टिहरी)। नैनबाग-मसूरी विकासनगर राष्ट्रीय राजमार्ग 507 की यातायात व्यवस्था अगलाड़ बैंड पर बने वैली ब्रिज के भरोसे है। पुल से वाहनों के आवागमन पर कोई निगरानी नहीं होने से यह पुल भी गगोरी में असी गंगा पर बने पुल की तरह कभी भी धराशायी हो सकता है। लापरवाही का आलम यह है कि अगलाड़ पर बने पुराने पुल के जर्जर होने पर वर्ष 2009 में 3.62 करोड़ रुपये से नए पुल निर्माण की स्वीकृति मिली थी। इस पर सीपीडब्ल्यूडी ने कार्य शुरू कर वर्ष 2016 तक दो करोड़ रुपये खर्च कर दिए। एनएच को साल भर पहले पता चला कि जहां पुल बनाया जा रहा है, वह हिस्सा प्रस्तावित लखवाड़-व्यासी बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में है। इसके चलते एक साल पहले इसका निर्माण कार्य बंद कर दिया गया। आनन-फानन में विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपये की लागत से 40 मीटर स्पान का वैली ब्रिज बनाया, जिसमें एक समय में एक ही वाहन संचालन की क्षमता है, लेकिन वहां कोई देखरेख नहीं होने से दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर यमुनोत्री और गंगोत्री धाम सहित बड़कोट, पुरोला, उत्तरकाशी ,त्यूनी, हिमाचल प्रदेश, मसूरी, विकासनगर, देहरादून, सहारनपुर, दिल्ली आदि क्षेत्रों को जाने वाले लोग मनमर्जी से वाहनों का संचालन कर रहे हैं।
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इनका कहना
दिसंबर अंत तक कालसी से बड़कोट तक दो लेन मार्ग के सर्वे की निविदा प्राप्त हो जाएगी। इसी सर्वे में लखवाड़ व्यासी बांध परियोजना के तहत कुछ स्थान चिह्न्ति किए जाएंगे। उसके बाद ही स्थायी पुल का निर्माण किया जाएगा। - नवनीत पांडेय, अधिशासी अभियंता, एनएच 507।
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