नई टिहरी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने टिहरी जनपद के कौड़िया में बंद पड़े मंकी रेस्क्यू सेंटर (बंदर बाडा) मामले की शिकायत को वन विभाग के सचिव को रेफर किया है। इस पर प्रमुख वन संरक्षक ने डीएफओ टिहरी से इस मामले में अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही बंदरों की बढ़ती संख्या से परेशान लोगों को निजात मिल पाएगी।
बंदर खाने-पीने की तलाश में जंगल से आबादी क्षेत्र में रुख कर रहे हैं। इस कारण ग्रामीण ही नहीं शहरी क्षेत्र के लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बंदर खेतों में तैयार गेहूं, धान और सब्जियों को तहस-नहस कर काश्तकारों के अरमानों पर पानी फेर रहे है। बंदरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 2015 में वन विभाग ने पड़ोसी राज्य हिमाचल की तर्ज पर टिहरी के कौड़िया में 40 लाख की लागत से मंकी रेस्क्यू सेंटर बनाया था। इस सेंटर में वन विभाग को आबादी क्षेत्र से बंदरों को पकड़कर लाना था। जहां बंदरों की नसबंदी कर दोबारा से जंगलों में छोड़ना था। मंकी रेस्क्यू सेंटर का ढांचा पूरी तरह बनने के बावजूद अभी तक बंदर बांध्यकरण केंद्र में बंदरों की नसबंदी कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसके पीछे विभाग सेंटर में मेडिकल स्टाफ, मशीन और लाइट की व्यवस्था के लिए बजट न होने की बात कह रहा था। जिस पर स्वामी रामतीर्थ आश्रम समिति टिहरी के सचिव विनोद चमोली ने पीएमओ को शिकायती पत्र भेजकर बंदर बाडा में बंाध्यकरण शीघ्र करने की मांग की थी। पीएमओ ने शिकायत को वन विभाग के सचिव को रेफर करते हुए उचित कार्रवाई की अपेक्षा की है। पीएमओ के संज्ञान लेने के बाद प्रमुख वन संरक्षक ने डीएफओ टिहरी को मामले की स्थिति से अवगत कराने को कहा था।
इनका क्या है कहना
प्रमुख वन संरक्षक को बंदर बाडा के मामले की जानकारी भेजी जा रही है। मेडिकल स्टाफ, मशीन, लाइट और अन्य व्यवस्थाओं के लिए बजट स्वीकृत होते ही कार्य शुरू किया जाएगा।
- कोको रोसो, डीएफओ टिहरी