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खेल महाकुंभ से निखरे खिलाडिय़ों को कैसे मिलेगा पुण्य

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नई टिहरी। अलग-अलग संस्थाओं की ओर से हर वर्ष खेल महाकुंभ का आयोजन किया जाता है, लेकिन प्रमाणपत्रों की मान्यता नहीं होने की वजह से इसमें दमखम दिखाने वाले खिलाड़ियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार आठ करोड़ 52 लाख 80 हजार रुपये खर्च कर महाकुंभ का आयोजन कर रही है, लेकिन यह महाकुंभ स्कूल गेम्स फैडरेशन ऑफ इंडिया और भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन व अन्य मान्यता प्राप्त खेल एजेंसियों से पंजीकृत नहीं कराया गया है। जिससे इतनी भारी भरकम धनराशि खर्च कर तैयार किए जाने वाले खिलाड़ियों को जारी किए जाने वाले प्रमाणपत्र का भविष्य में उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पाएगा। हर वर्ष शिक्षा विभाग, युवा कल्याण और खेल विभाग खेलों का आयोजन करता रहा है, बावजूद आयोजकों का तर्क है कि महाकुंभ का उद्देश्य खिलाड़ियों को फील्ड तक लाना है।

बजट आवंटन पर उठाए सवाल
नई टिहरी। खेल महाकुंभ के आयोजन के लिए शासन की ओर से सभी 13 जिलों को 15-15 लाख का बजट आवंटन करने पर महाकुंभ के सफल संचालन पर सवाल उठ रहे हैं। जिले में जहां ज्यादा ब्लॉक हैं, वहां महाकुंभ किसी तरह संपन्न कराया जाएगा। लेकिन जहां ब्लॉकों की संख्या कम हैं, वहां से आवंटित बजट वापस करने की स्थिति आ सकती है। न्याय पंचायत से लेकर ब्लॉक स्तर पर की जाने वाली प्रतियोगिताओं के लिए अलग-अलग बजट आवंटित किया गया है, लेकिन जिला स्तर पर महाकुंभ के लिए प्रत्येक जिले को पुरस्कार के लिए चार लाख 90 हजार पांच सौ रुपये, खेल आयोजन के लिए नौ लाख 62 हजार पांच सौ रुपये और क्रॉस कंट्री के लिए 50 हजार रुपये सहित कुल 15 लाख तीन हजार रुपये का बजट दिया गया है। जबकि हर जिले में ब्लॉकों की संख्या अलग-अलग है। टिहरी जिले में नौ ब्लॉक, पौड़ी में 15, अल्मोड़ा में 11, बागेश्वर में तीन, चमोली में नौ, चंपावत में चार, देहरादून व हरिद्वार में छह, नैनीताल व पिथौरागढ़ में आठ, रुद्रप्रयाग में तीन, ऊधमसिंह नगर में सात और उत्तरकाशी में छह ब्लॉक हैं। ऐसे में सभी जिलों को समान धनराशि आवंटन को लेकर सवाल उठना लाजिमी है।
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महाकुंभ में दिए जाने वाले प्रमाणपत्र की मान्यता नहीं है, लेकिन कार्यक्रम की महत्ता है। यह खिलाड़ियों को फील्ड तक लाने का प्रयास है। चयनित खिलाड़ियों को कोई भी एसोसिएशन चुन सकती है। बजट आवंटन को ठीक करने का प्रयास किया जाएगा।
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- प्रशांत आर्य, संयुक्त निदेशक खेल।
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