नई टिहरी। भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण मात्र औपचारिकता बनकर रह गया। प्राधिकरण के अधिकारी और कर्मचारी देहरादून का मोह नहीं त्याग पा रहे हैं। सुख-सुविधा भोगने के लिए अधिकारियों ने मुख्य कार्यालय को कैंप कार्यालय और कैंप कार्यालय को मुख्यालय बना दिया है। जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी देहरादून में ही भागीरथी और भिलंगना घाटी के 412 गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने का सपना सजों रहे हैं।
बांध प्रभावित टिहरी और उत्तरकाशी जिले के गांवों के विकास के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 27 जनवरी 2005 को भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण का गठन किया गया था। प्राधिकरण गठन के पीछे गोमुख से लेकर देवप्रयाग तक भागीरथी और भिलंगना नदियों के किनारे बसे 412 गांवों का विकास और झील का सुंदरीकरण करना था। झील से 200 मीटर दूरी पर स्थित सभी गांवों में रास्ते, पेयजल, सिंचाई, पुलिया का निर्माण प्राधिकरण को करना था। बौराड़ी के जिला पंचायत भवन में प्राधिकरण का मुख्य कार्यालय तो खोल दिया गया, लेकिन प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, उपाध्यक्ष सहित अन्य कर्मचारी देहरादून में ही कार्यालय जमाकर सरकारी सुख-सुविधाएं भोग रहे हैं। बौराड़ी कार्यालय मात्र एक जेई और चतुर्थ श्रेणी कर्मी के भरोसे चल रहा है। हालत यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों से फरियाद लेकर आने वाले लोगों को मुख्य कार्यालय से संतोषजनक जवाब तक नहीं मिल पाता है। प्राधिकरण अपने मूल कार्य करने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। 11 सालों में प्राधिकरण बांध प्रभावित गांवों और झील के विकास के लिए मास्टर प्लान तक तैयार नहीं कर पाया है।
कोट
भागीरथी और भिलंगना नदी किनारे बसे 412 गांवों में विकास कार्यों को अंजाम देने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है। विकास कार्यों को गति देने के लिए मास्टर प्लान का प्रस्ताव कुछ दिनों बाद शासन को भेजा जा रहा है। प्राधिकरण के अधिकांश कार्य और बैठकें देहरादून में होती है। इन्हीं तकनीकी कारणों को देखते हुए मुख्य कार्यालय को नई टिहरी ले जाने में सफलता नहीं मिल पाई।
-कीर्ति सिंह नेगी, उपाध्यक्ष, भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण
भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा हुआ है।जिन औचित्यों को लेकर न्यायालय ने प्राधिकरण गठन के निर्देश दिए थे। उस पर कही भी अमल नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। पिछले 11 सालों से ही एक अधिकारी को मुख्य कार्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। क्यों नहीं मुख्य कार्यपाल का स्थानांतरण होता है।
धन सिंह नेगी, विधायक टिहरी।
जारी-गंगादत्त थपलियाल