नई टिहरी। प्रतापनगर के आवागमन को 11 साल से बन रहे चांठी-डोबरा पुल के अवशेष कार्य को केंद्र सरकार की ओर से बजट न मिलने से निर्माण की गति धीमी पड़ गई है। मुख्य पुल को जोड़ने के लिए 15 अगस्त से रस्से खिंचने का कार्य प्रस्तावित था, लेकिन बजट के अभाव से लेकर अन्य दिक्कतों से काम शुरू नहीं हो पाया। पुल के कार्य में तेजी लाने के लिए प्रत्येक माह करीब पांच से आठ करोड़ चाहिए।
टिहरी बांध की झील के ऊपर 2006 में शुरू हुए चांठी-डोबरा पुल के निर्माण पर 2011 तक एक अरब 25 करोड़ खर्च हुए। अगस्त 2015 में कंसलटेंस ने डिजायन तैयार कर सरकार को दिया था। सरकार ने डिजायन का परीक्षण करवा कर पुल का निर्माण करवाने को एक अरब 49 करोड़ 95 की स्वीकृति दी थी। इसके बाद फरवरी 2016 में दोबारा से पुल निर्माण शुरू हुआ। वर्तमान में पूर्व में बने 58-58 मीटर के चार टॉवरों का स्टैथनिंग, चांठी साइड से मुख्य पुल तक पहुंचने को 25 मीटर लंबा एप्रोच ब्रिज, सात सौ मीटर कैटवॉक, मुख्य पुल को जोड़ने के रस्से, गार्डर, प्लेटें समेत अन्य 15 सौ टन की सामग्री जो पंजाब के रोपड़ से साइड पर पहुंच गई थी। 15 अगस्त से मुख्य पुल को जोड़ने के लिए सात-सात सौ मीटर के 24 रस्से खिंचने का काम प्रस्तावित था, लेकिन बजट के अभाव एवं अन्य दिक्कतों के चलते रस्से खिंचने का काम शुरू नहीं हो पाया। पुल निर्माण पर खर्च होने वाली धनराशि को 50-50 फीसदी केंद्र एवं राज्य सरकार ने देना था। पूर्ववर्ती सरकार ने नाबार्ड से लेकर अपने हिस्सा का 74 करोड़ 95 लाख करोड़ पुल निर्माण को दे दिए हैं पर केंद्र सरकार ने डेढ़ साल बाद भी अपने हिस्से की 74 करोड़ 95 लाख की धनराशि नहीं दी। लोनिवि चांठी-डोबरा प्रोजेक्ट ईई केएस असवाल का कहना है कि पुल निर्माण को मिला बजट खर्च हो चुका है। अवशेष बजट के लिए नाबार्ड को डीपीआर भेजी है।