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पर्यावरण बचाने को गुरू ज्ञान दे रहे प्रो. अग्रवाल

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चंबा (टिहरी। गढ़वाल विवि के एसआरटी परिसर बादशाहीथौल के शिक्षक प्रो. एनके अग्रवाल 27 साल से शिक्षा के साथ ही छात्रों में पर्यावरण संरक्षण की भी अलख जगाने का काम कर रहे हैं। प्रो. अग्रवाल जैव विविधता और मत्स्य संपदा के संरक्षण और संवर्धन पर कई शोध भी कर चुके हैं।
पर्यावरण संरक्षण की मुहिम चलाने वाले प्रो. अग्रवाल एसआरटी परिसर में जंतु विज्ञान में विभागाध्यक्ष हैं। प्रकृति पर मंडराते खतरों को देखते हुए वे किताबी ज्ञान के साथ ही छात्रों को अलग से प्रकृति प्रेम का भी पाठ पढ़ा रहे हैं। पर्यावरण को बचाने के लिए समय-समय पौधारोपण करने के साथ ही छात्रों को पौधे लगाने के लिए भी वह प्रेरित करते हैं। इसके लिए छात्रों को अपने जीवन में शादी-विवाह और अन्य कार्यक्रमों में एक पौधा लगाने का संकल्प दिलाया जाता है। प्रो. अग्रवाल ने गढ़वाल हिमालय की नदियों में पाई जाने वाली प्रमुख आठ मत्स्य प्रजातियों का डीएनए बार कोड तैयार कर उसे यूएसए के एनसीबीआईसी के डाटा बेस में सूचीबद्ध कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। गढ़वाल हिमालय की गंगा और सहायक नदियों में मुख्य रूप से पाई जाने वाली स्नो ट्राउट मत्स्य प्रजाति के बीज उत्पादन के लिए कृत्रिम एवं उत्प्रेरक तकनीक भी उन्होंने विकसित की है।
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पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए एशिया संस्था ने उन्हें 2007 में गोल्ड मेडल से नवाजा। 2010 में मत्स्य वैज्ञानिक अवार्ड भी दिया गया। प्रो. अग्रवाल कहते हैं कि मानव के सबसे सच्चे मित्र पेड़-पौधे हैं, इसलिए सभी को उनके संरक्षण और संवर्धन पर ध्यान देना चाहिए।
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