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भूएमि प्रतिकर में पीएमओ से जगी न्याय की उम्मीद

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नई टिहरी। 15 वर्ष से शासन में लटका भूमि प्रतिकर निर्धारण का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में जाने से ग्रामीणों को न्याय की उम्मीद जगी है। मामला टिहरी बांध से जुड़ा है। परियोजना के लिए अर्जित की गई भूमि के प्रतिकर भुगतान में असमानता होने पर काश्तकार वर्ष 2002 से मिलानी क्षेत्र में एक समान दरों पर भुगतान की मांग करने पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने दरों के निर्धारण के लिए शासन से दिशा-निर्देश जारी करने को पत्र भेजा था, लेकिन हल नहीं निकलने पर काश्तकारों ने पीएमओ की शरण ली है। पीएमओ ने मुख्य सचिव को समस्या का निस्तारण करने के निर्देश दिए।
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टिहरी बांध की कट ऑफ डेट सितंबर 1976 तय करने पर प्रशासन ने बांध के लिए अर्जित की जाने वाली भूमि की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी, लेकिन वर्ष 2003 में अर्जित भूमि के प्रतिकर भुगतान के समय पुनर्वास निदेशालय ने भूमि अर्जन अधिनियम की धारा 23 का हवाला देते हुए धारा-4 लागू करते समय व उससे पहले भूमि के क्रय-विक्रय की दरों के आधार पर भूमि का प्रतिकर तय किया। इस पर काश्तकारों ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि भूमि के क्रय-विक्रय पर पहले से ही रोक होने पर यह संभव नहीं है। बावजूद आपत्ति की अनदेखी करते हुए थौलधार ब्लॉक में एनएच-94 से सटे ग्राम सरोट, डोभन, जसपुर चक, भणेती सेरा, रमोलागांव, खांड-बिड़कोट और भंगर के काश्तकारों को 4800 से 5020 रुपये प्रतिनाली के हिसाब से भुगतान किया गया। काश्तकारों का कहना है कि पुनर्वास निदेशालय ने दोहरी नीति अपनाते हुए उनके पास के गांव चिन्याली के काश्तकारों को 78 हजार रुपये प्रतिनाली की दर से भुगतान किया है। तब से वह भी मिलानी गांव चिन्याली के सर्किल रेट की तर्ज पर भुगतान की मांग करते रहे हैं, लेकिन 15 साल तक पुनर्वास निदेशालय के चक्कर काटने से थक हारकर पीड़ितों ने न्याय के लिए पीएमओ का दरवाजा खटखटाया है। पीएमओ की चिठ्ठी के आधार पर चीफ सेक्रेट्री ने डीएम टिहरी से प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश जारी किए हैं। काश्तकार रोशन लाल का कहना है कि मामला पीएमओ में जाने से काश्तकारों को देर से ही सही अब न्याय मिलने की उम्मीद है।
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पीएमओ के हवाले से चीफ सेक्रेट्री का पत्र मिला है। उसके अनुरूप रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेज दी जाएगी। - सोनिका, डीएम टिहरी।
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