ऊखीमठ। ब्लॉक के पर्यटन गांव सारी में रविवार को ग्वाल देवता ग्वाल बालों के देवता की पूजा हुई। परंपरा के अनुसार ग्वाल देवता को दूध, दही, घी, मक्खन व रोट का भोग लगाया गया। बच्चे, युवा अपने-अपने घर से भोग सामग्री आए और देवता को अर्पित की। पूजा की खास बात यह है कि जिन परिवारों के घरों में दूध, दही, घी, मक्खन उपलब्ध नहीं रहता है उन परिवारों को भी पूजा में शामिल होने के लिए उनके पड़ोसी पूजा से पहले उनके घर पर दूध, दही, घी, मक्खन पहुंचा देते हैं। तब वे परिवार पूजा में शामिल होते हैं। पूजा के दिन से गांव के चारागाह का कुछ क्षेत्र पशुओं के चरान-चुगान व घास काटने के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाता है। इसे दीपावली पर खोला जाता है। पुजारी चैत सिंह भट्ट ने बताया कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। सरपंच देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि हर साल श्रावण मास में तय रविवार के दिन ही ग्वाल देवता की पूजा होती है। संवाद