स्वीकृत धनराशि 839 लाख से रिवाइज होकर 1125 लाख तक पहुंच गई है। कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग की मानें तो भवन को पूरी तरह तैयार होने से कम से कम दस माह का समय और लगेगा।
वर्ष 2006-07 में मुख्य बाजार से लगभग चार किमी दूर कोटेश्वर-खुरड में विकास भवन के लिए भूमि का चयन किया गया। इस कार्य के लिए शासन से 8 करोड़ 39 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। लेकिन शुरूआती दो वर्ष भूमि स्थानांतरण और वन भूमि निस्तारण में ही लग गए।
वर्ष 2010 में निर्माण कार्य शुरू हुआ। लेकिन अधिकांश चट्टानी भाग होने से कार्यदायी संस्था को दिक्कतें हुई। भारी मशीनों की मदद से 60 मीटर लंबे, 40 मीटर ऊंचाई और करीब 15 मीटर चौड़ाई में चट्टान काटकर भवन निर्माण के लिए भूमि तैयार की गई। लेकिन शासन स्तर से वर्षभर में एक या दो किश्ते मिलने से निर्माण को कभी भी रफ्तार नहीं मिल पाई।
स्थिति यह है कि पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी कार्यदायी संस्था द्वारा एक ब्लाक को पूरी तरह से पूरा किया जा सका है। दो ब्लाक पर रंग-रोगन का कार्य चल रहा है। चौथे ब्लाक की पहली मंजिल का कार्य शुरू नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि शासन द्वारा देरी से धन मिलने और निर्माण सामग्री की कीमतें बढने से कार्य पर असर पड़ रहा है। शासन द्वारा अभी तक स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 787 लाख रुपये अवमुक्त किए गए हैं।
ये विभाग होंगे संचालित
विकास भवन पर, मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, समाज कल्याण, उद्यान, कृषि, सांख्यिकी सहित 12 से 14 भवनों का संचालन होना है। जिले में 70 फीसदी विभाग किराए के भवनों पर चल रहे हैं।
विकास भवन को पूरी तरह से तैयार होने में कम से कम दस माह का समय और लगेगा। एक ब्लाक का कार्य फाइनल हो चुका है। दो ब्लाक पर रंग-रोगन हो रहा है, जो इस माह के अंत तक पूरा हो जाएगा।
-- केसी डिमरी, ईई आरडब्लूडी
सबकुछ ठीक रहा तो विकास भवन के दो ब्लाक पर आगामी 26 जनवरी से कुछ विभागों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। निर्माण कार्य को लेकर कार्यदायी संस्था से निरंतर जानकारी प्राप्त कर निरीक्षण भी किया जा रहा है।
-- सुनील कुमार, सीडीओ रुद्रप्रयाग