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शिक्षकों और संसाधनों का इंतजार

Tue, 30 Jun 2015 10:05 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला
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35 दिन के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद बुधवार को शिक्षण सत्र 2015-16 का पुन: आगाज हो रहा है। सरकारी व निजी शिक्षण संस्थाओं में पठन-पाठन शुरू हो जाएगा। बावजूद इसके ज्यादातर स्कूलो में शिक्षकों और संसाधानों का इंतजार फिर भी बना रहेगा।
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रुद्रप्रयाग जनपद में प्राथमिक से लेकर माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे संचालित हो रही है। 
वर्ष 1997 में चमोली, टिहरी और पौड़ी जिले के दुर्गम क्षेत्रों को शामिल कर अस्तित्व में आए रुद्रप्रयाग जनपद में शिक्षा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाई है।

जनपद में संचालित 559 राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में 94 स्कूल भवन पांच वर्ष से क्षतिग्रस्त होकर हादसों का सबब बने हैं। 20 से अधिक स्कूलों के भवन अधर में हैं। 154 राजकीय विद्यालयों में शौचालय की व्यवस्था नहीं है तो 121 में बिजली नहीं है। 79 प्राथमिक स्कूलों में आपदा के बाद से पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हैं। पांच वर्षों में 16 प्राथमिक विद्यालयों पर ताला लटक चुके हैं। इस सत्र में जूनियर हाईस्कूल भटवाड़ीसैंण को मई माह में बंद कर दिया गया है।

कई स्कूल मुखियाविहीन
जिले में संचालित 77 इंटर कालेजों में से 23 में प्रधानाचार्य नहीं हैं। 31 हाईस्कूलों में से 17 मुखियाविहीन हैं। केदारघाटी के 14 इंटर कालेज मुखिया विहीन हैं। जनपद में प्रवक्ता के 204 और एलटी के 284 पद रिक्त हैं। जबकि 559 प्राथमिक विद्यालयों में 65 फीसदी विद्यालय एकल शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। जूनियर की स्थिति भी भगवान भरोसे है।
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घट रही छात्र संख्या
जनपद में चार-पांच वर्षों में छात्र संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। 2014-15 में जहां जनपद में कक्षा 1 से 12 तक 23772 बच्चे थे। वहीं वर्तमान सत्र में 28 मई तक यह संख्या 18625 है, जो बीते वर्ष मई की तुलना में 30 फीसदी कम है। अगस्त्यमुनि व जखोली ब्लाक के 175 जूनियर से लेकर माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा छह में 26 सौ से अधिक प्रवेश हुए हैं, जो बीते वर्ष से छह प्रतिशत कम है।


कोट-
शासन स्तर से होने वाले तबादलों के बाद स्थिति में सुधार की संभावना है। स्कूलों में छात्र संख्या घटने का मुख्य कारण शिक्षा का अधिकार लागू होना है, जिसके तहत 25 फीसदी गरीब बच्चे प्राइवेट स्कूलों में प्रवेश ले सकते हैं। विद्यालयों से जुड़ी अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए हरसंभव प्रयास होंगे। - एमएस रावत, सीईओ रुद्रप्रयाग
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विनय
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