आपदा के बाद केदारनाथ धाम में करोड़ों रुपये के पुनर्निर्माण होने के बावजूद इसके पैदल मार्ग के नए पड़ावों की सुध नहीं ली गई है। रामबाड़ा से केदारनाथ तक मंदाकिनी नदी के दोनों तरफ भूस्खलन और भूकटाव से खतरा पैदा हो रहा है।
16/17 जून 2013 में आई केदारनाथ आपदा से केदारपुरी व मंदाकिनी नदी के किनारे भूस्खलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। नदी किनारे पूरे पैदल रास्ते पर जमीन के अंदर से रिस रहा पानी भूस्खलन का कारण बना है। आपदा के बाद रामबाड़ा से केदारनाथ तक नए एलाइनमेंट पर पैदल मार्ग बनाया गया है। इस पैदल मार्ग में छोटी लिनचोली, बड़ी लिनचोली, छानी चट्टी और बेस कैंप स्थित है, जो यात्रा के नए पड़ावों के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। बावजूद इसके वहां मंदाकिनी नदी से हो रहे दोतरफा भूकटाव की रोकथाम के लिए शासन स्तर पर योजना नहीं बन पाई है।
केदारनाथ का पूरा क्षेत्र मध्य हिमालय में है। यहां सभी भूआकृतियां बेहद संवेदनशील है। आपदा में यहां की पहाड़ियां नष्ट हो चुकी है। ऐसे में स्थितियां बदल गई हैं। चोराबाड़ी से कुंड तक मंदाकिनी नदी का ढलान अधिक होने से पानी भूकटाव कर रहा है। इन हालात में पड़ावों पर स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए।- प्रो. वाईपी सुंद्रियाल, भूविज्ञान विभाग केंद्रीय गढ़वाल विवि श्रीनगर
निम की ओर से केदारनाथ में पुनर्निर्माण व बाढ़ सुरक्षा के कार्य किए जा रहे हैं। निचले स्थान रामबाड़ा में करीब दो सौ मीटर क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा कार्य होना है। हालांकि अब तक शासन से कार्ययोजना तय नहीं हो पाई है।- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग