वनाग्नि बुझाने के लिए वन कर्मियों के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। फायर रैक, पानी की बोतल व टार्च के भरोसे ही वन कर्मी जंगलों में लगी आग बुझा रहे हैं। सुरक्षात्मक उपकरण नहीं होने से कई बार वन कर्मी झुलस भी हो जाते हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन इनका वजन अधिक होने से उन्हें साथ ले जाना मुमकिन नहीं है।
हर वर्ष फायर सीजन के दौरान कई हेक्टेअर वन संपदा आग की चपेट में आने से नष्ट हो जाती है। हालांकि विभाग स्तर से आग बुझाने के लिए प्रयास किए जाते हैं, लेकिन उचित उपकरण नहीं होने से उनका प्रयास पूरा नहीं हो पाता है। फायर सीजन के दौरान वन कर्मियों को फायर रैक, फोलासकी, पानी की बोतल, हेलमेट टार्च, फायर प्रूफ जूते, फर्स्ट एड बॉक्स आदि देने का प्राविधान हैं। बावजूद इसके जिले में फायर सीजन के दौरान कर्मियों को फायर रैक, टार्च व पानी की बोतल ही मुहैया कराई जाती है। ऐसे में कर्मचारी जंगल में ही हरे पत्तियों की टहनियों को मिलाकर झापा बनाकर आग बुझाने का काम करते हैं। कभी-कभार इसमें वन कर्मी झुलस भी जाते हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी राजीव धीमान ने बताया कि फायर सीजन के दौरान वन कर्मियों को समुचित उपकरण व संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। बताया कि पूरी टूल किट का वजन अधिक होने से सभी उपकरणों को साथ ले जाना मुमकिन नहीं है। ऐसे में जरूरी उपकरण ही वनाग्नि रोकने के लिए साथ ले जाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी रेंज में कर्मियों के पास उपकरण नहीं है तो उन्हें उपकरण मुहैया कराए जाएंगे।