ग्राम पंचायत मरोड़ा की अनुसूचित जाति बस्ती मवाण-सौड़ एकल पेयजल योजना में हुई धांधली की जांच में तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी को दोषी पाया गया है। विभागीय स्तर पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर तत्कालीन जिला विकास अधिकारी प्रभारी /परियोजना अर्थशास्त्री एमएस नेगी ने मामले की जांच कर रिपोर्ट सीडीओ को सौंप दी है। जांच में बताया गया कि तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी ने योजना की सामग्री बेच दी थी और सामग्री की खरीद पुन: स्तर से कर पेयजल योजना का कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन जिस तरह से तत्कालीन अधिकारी द्वारा गलत तरीके से एक ही योजना के लिए दो मदों में धनराशि स्वीकृत कराने के साथ अवमुक्त कराई और सामग्री को बेचा गया, वह नियम विरुद्ध है।
इधर, मुख्य विकास अधिकारी डीआर जोशी ने बताया कि तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ जल्द विभागीय स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा विकास विभाग अगस्त्यमुनि के अधिकारियों से भी जानकारी ली जाएगी।
यह था मामला-
वर्ष 2006-07 में ग्राम पंचायत मरोड़ा के मवाणा-सौड़ अनुसूचित जाति बस्ती के लिए क्षेत्र पंचायत सदस्य के प्रस्ताव पर एकल पेयजल योजना स्वीकृत की गई थी। निर्माण के लिए जिला योजना और 12वें वित्त में तत्कालीन ग्राम अधिकारी की ओर से क्रमश: 90 व 50 हजार रुपये की राशि स्वीकृत कराकर अवमुक्त की गइ, लेकिन निर्माण कार्य शुरू करने के बजाय खरीदे पाइप बेच दिए गए थे। इस मामले का खुलासा बीते वर्ष अक्तूबर में आरटीआई से मांगी गई सूचना से हुआ था। अमर उजाला ने 28 नवंबर 2016 को वीडीओ ने बेच दिए योजना के पाइप, शीर्षक से इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।