उत्तराखंड राज्य निर्माण के ढाई दशक बाद भी रुद्रप्रयाग जनपद के कई गांव सड़क से नहीं जुड़ पाएं हैं, इस कारण मरीज व गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को डंडी या कुर्सी का सहारा लेना पड़ रहा है। साथ ही जहां, बरसता से सड़कें जर्जर हैं। वहां भी मरीज को अस्पताल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है।
केदारनाथ विधानसभा के सबसे दूरस्थ गांवों में शामिल गौंडार, तोषी आज भी सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं। इन गांवों के लिए स्वीकृत मोटरमार्ग बजट के अभाव में अधूरे हैं। इस कारण ग्रामीण छह से सात किमी पैदल नापने को मजबूर हैं। इन हालातों में सबसे अधिक परेशानी बीमार, घायल और गर्भवती को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है।
गौंडार के ग्रामीण को घने जंगल के बीच से होकर छह किमी पैदल चलकर डंडी के सहारे मरीज, घायल व गर्भवती को रांसी गांव पहुंचना पड़ता है। यहां से 41 किलोमीटर दूर वाहन से सफर कर ग्रामीण अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते हैं, यहां से मरीज को सीधे रेफर किया जाता है।
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ग्राम प्रधान वीर पंवार बताते हैं कि परिजन गर्भवती महिला को प्रसव से लगभग दो महीने पहले ही राऊंलेक, मनसूना या ऊखीमठ में चले जाते हैं और किराया पर कमरा लेकर रहते हैं, जिससे प्रसव के दिन कोई दिक्कत न हो।
इधर, अगस्त्यमुनि ब्लॉक के बच्छणस्यूं के ग्राम पंचायत निषणी व बंगोली गाम पंचायत के निषणी, कलेथ, पणधारा, चाम्यू, पौड़ीखाल, ढिंगणी, ढमणी गांव के ग्रामीणों के लिए बुखार की दवा के लिए भी चार से पांच किलोमीटर की दौड़ लगानी पड़ रही है। गर्भवती, बीमार और घायल को डंडी के सहारे अस्पताल खांकरा ले जाता है, जहां से जिला चिकित्सालय रुद्रप्रयाग या बेस अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है।
सड़क से वंचित गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश गांवों को सड़क से जोड़ा जा चुका है, जो वंचित है, उनके लिए शासन स्तर पर बातचीत जारी है।
- भरत सिंह चौधरी, विधायक, रुद्रप्रयाग