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भीमबली से केदारनाथ तक दो से 20 फीट तक बर्फ

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गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग और केदारपुरी दो माह से बर्फ से लकदक है। पैदल मार्ग पर विशालकाय हिमखंड पसरे हैं। यहां दो से 20 फीट से भी अधिक बर्फ जमा है। मंदिर परिसर क्षेत्र में छह से दस फीट तक बर्फ जमा है। इन हालात में यात्रा व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के लिए प्रशासन के सामने बर्फ से पार पाना सबसे बड़ी चुनौती है। 20 फरवरी से बर्फ सफाई का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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केदारनाथ धाम के निरीक्षण से लौटे जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल और पुलिस अधीक्षक नवनीत भुल्लर ने बताया कि गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर भीमबली से बर्फ जमा है। यहां से केदारनाथ तक लगभग नौ किमी पैदल मार्ग बर्फ से लकदक है। रामबाड़ा में साढ़े तीन फीट तो छोटी लिनचोली में छह फीट तक बर्फ जमा है। रामबाड़ा से रुद्रा प्वाइंट तक हालात काफी विषम हैं। यहां सात से अधिक जगहों पर 20 फीट तक ऊंचे और 45 से 50 फीट तक लंबाई में हिमखंड पसरे हैं। अन्य स्थानों पर भी बर्फ में पैर फंसने का खतरा बना है। इन हालातों में आवाजाही करना खतरे से खाली नहीं हैं। इसके अलावा भीमबली से केदारनाथ तक पैदल मार्ग पर तीन से आठ और केदारनाथ में छह से 10 फीट तक बर्फ मौजूद है। डीएम ने बताया कि वर्तमान हालातों को देखते हुए 20 फरवरी से पैदल मार्ग पर डीडीएमए, डीडीआरएफ और यात्रा मैनेजमेंट बल के मजदूर/जवानों द्वारा बर्फ सफाई का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। अप्रैल प्रथम सप्ताह तक धाम तक आवाजाही शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे समय पर यात्रा तैयारियां पूरी की जा सके।
बर्फ सफाई के लिए 50 लाख की जरूरत
रुद्रप्रयाग। पैदल मार्ग से लेकर केदारपुरी में बर्फ सफाई के लिए 50 लाख रुपये की जरूरत होगी। इसके लिए कार्यदायी संस्था डीडीएमए ने निविदाएं भी आमंत्रित की हैं। कार्यदायी संस्था के सहायक अभियंता दीपचंद्र नवानी ने बताया कि पहले चरण में दो से ढाई सौ मजदूरों को बर्फ सफाई के लिए लगाया जाएगा।
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नुकसान बीते वर्ष से कम
रुद्रप्रयाग। जिलाधिकारी ने बताया कि पैदल मार्ग से धाम में बीते वर्ष की अपेक्षा नुकसान कम हुआ है, लेकिन क्षति का सही आकलन बर्फ की सफाई के बाद ही लग पाएगा। लिनचोली में जीएमवीएन की हट्स को क्षति पहुंची है। इसके अलावा कुछ जगहों पर रास्ते में रेलिंग टूटी है। केदारनाथ में भी कुछ हट्स के आगे का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। सबसे अधिक नुकसान बिजली लाइन को हुआ है। भीमबली से धाम तक लगभग तीस बिजली के पोल धराशायी हुए हैं।
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