रुद्रपुर। दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में पुलिस ने दो और इंस्टीट्यूटों पर शिकंजा कसा है। एसआईटी ने हरियाणा के झज्जर और रेवाड़ी के दो इंस्टीट्यूट के खिलाफ बाजपुर और जसपुर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। इससे पहले बृहस्पतिवार को मेरठ और हरियाणा के एक-एक इंस्टीट्यूट पर मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है।
हाईकोर्ट के आदेश पर शासन ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। जांच के लिए गठित एसआईटी ने जिले के समाज कल्याण विभाग से वर्ष 2011-12 से लेकर अब तक बांटी गई छात्रवृत्ति का विवरण मांगा था। समाज कल्याण विभाग से मिले दस्तावेजों की जांच में सामने आया कि स्थानीय दलालों ने जसपुर और बाजपुर के छात्रों का दूसरे प्रदेशों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश दिखाया।
जांच में पता चला कि दूसरी योजना का लाभ यहां के छात्रों को दिलाने, पहले पढ़ चुके छात्रों को छात्रवृत्ति दिलाने के लिए उनके शैक्षिक, जाति, स्थायी निवास प्रमाण पत्र और उनके पिता का आय प्रमाण पत्र लेकर शैक्षिक संस्थानों के मालिकों से मिलकर समाज कल्याण विभाग से छात्रवृत्ति ली गई।
यही नहीं सामान्य वर्ग के कई छात्रों को भी एससी-एसटी और ओबीसी दिखा दिया गया। बाजपुर के छात्रों की एमडी कॉलेज ऑफ एजुकेशन झज्जर रोड हरियाणा ने भी ऐसे ही छात्रवृत्ति ली। वहीं जसपुर क्षेत्र के दलालों ने संदेश कॉलेज ऑफ एजुकेशन कनेना कोसली रोड करोलीमोरे रेवाड़ी (हरियाणा) में दाखिला दिखाकर लाखों रुपये की छात्रवृत्ति हड़प ली।
एसआईटी के भीम भाष्कर आर्य ने जसपुर कोतवाली में संदेश कॉलेज ऑफ एजुकेशन कनेना कोसली रोड करोलीमोरे रेवाड़ी (हरियाणा) और गोविंद बल्लभ जोशी और एनएन पंत ने बाजपुर कोतवाली में एमडी कॉलेज ऑफ एजुकेशन झज्जर रोड हरियाणा के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है।
हर ब्लॉक में फैला है दलालों का नेटवर्क
छात्रवृत्ति घोटाले के सूत्रधारों में इंस्टीट्यूट तो कम, यहां के लोकल दलाल अधिक रहे। दलालों की पैठ जिले के हर ब्लॉक में रही। ये दलाल पढ़ने वाले छात्रों पर नजर रखते थे। इन छात्रों का दस्तावेज लेकर उसे अपने हिसाब से मोडिफाई करा लेते थे। इसके बाद छात्रों का इंस्टीट्यूट में फर्जी दाखिला दिखाकर समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर देते थे।
विभाग भी आंखें बंद कर छात्रवृत्ति बांट देता था। इससे जिले में ही हर साल समाज कल्याण विभाग को लाखों रुपये का चूना लग चुका है। विभागीय सेटिंग का आलम यह था कि जिले के छात्र बाहर क्यों और कैसे पढ़ रहे हैं, इसकी जांच की जरूरत नहीं समझी जाती थी। यही कारण रहा कि उत्तराखंड के छात्रों को यूपी के मेरठ के साथ ही हरियाणा के कॉलेजों में पढ़ाई दिखाकर दलाल रुपये हड़पते रहे।
कई छात्रों के नहीं मिले पते
छात्रवृत्ति घोटाले में एसआईटी को कई चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर इंस्टीट्यूटों ने समाज कल्याण विभाग को चूना लगाया तो कई ऐसे छात्रों के नाम और पतों पर पैसा लिया गया जो थे ही नहीं। एसआईटी की जांच में करीब आधा दर्जन ऐसे छात्र मिले, जिनके नाम से छात्रवृत्ति लेने के लिए खाते भी खोले गए। नाम किसी और छात्र का दर्ज कराया गया और पता किसी और का लिखा गया। जांच में एसआईटी को कई छात्रों के पते भी सही नहीं मिले।
दिनभर सत्यापन में जुटी रही एसआईटी
रुद्रपुर। छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के लिए एसआईटी दिनभर पसीना बहाती रही। घोटाला सामने आने के बाद एसआईटी ने जसपुर और बाजपुर क्षेत्र के करीब 100-150 छात्रों को जांच के दायरे में लिया था। शुक्रवार को एसआईटी टीम ने दोनों ब्लॉकों के 50 से अधिक छात्रों का सत्यापन किया।
सात साल से चल रहा है खेल
राज्य में छात्रवृत्ति घोटाले की नींव 2012 में ही पड़ गई थी। इसके बाद से दलाल हर साल राज्य के हजारों छात्रों के दस्तावेज एकत्र करते थे। उनका एडमिशन दूसरे राज्यों के इंस्टीट्यूट में दिखाया जाता। बताया जा रहा है कि 2012 से अब राज्य के करीब एक लाख छात्रों के नाम पर पैसा निकाला गया है। अब तक करोड़ों रुपये छात्रवृत्ति के नाम पर निकाले जा चुके हैं।
राज्य में 450 इंस्टीट्यूट हैं जांच के दायरे में
ऊधमसिंह नगर जिले समेत राज्य में करीब 450 इंस्टीट्यूट जांच के दायरे में हैं। बताया जा रहा है कि ऊधमसिंह नगर जिले में 150 के करीब सरकारी और गैर सरकारी शिक्षण संस्थान शामिल हैं। इन इंस्टीट्यूटों पर छात्रवृत्ति के नाम पर गलत दस्तावेज लगाकर पैसे लेने का शक है।
मैदानी जिले के छात्र निशाने पर
मैदानी जिले के छात्र दलालों के निशाने पर अधिक रहे हैं। ऊधमसिंह नगर, देहरादून और हरिद्वार जिले के छात्रों का दाखिला इन शिक्षण संस्थानों में अधिक कराया गया। यहां के छात्रों के दस्तावेज जमा कर बाहरी राज्यों के शिक्षण संस्थानों में फर्जी दाखिला दिखाया गया।
कोट
एसआईटी मामले की जांच कर रही है। जांच अभी लंबी चलेगी। सभी दस्तावेजों की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा। - देवेंद्र पींचा, एएसपी रुद्रपुर।